ससुर ने 1 बहू की चूत में उंगली डाली best antarvasna story

ससुर ने 1 बहू की चूत में उंगली डाली Best Antarvasna Story

Best antarvasna story: मैं अपने गांव में भाई के पास गया. वहां मेरा ध्यान मेरे भतीजे की जवान बीवी की ओर गया. उसकी नजर भी वासना से भरी लगती थी. ससुर बहू सेक्स की इस स्टोरी का मजा लें.

नमस्कार दोस्तो, मैं विशू मेरे जीवन की ससुर बहू सेक्स की सत्य घटना बताने जा रहा हूं.
बात ज्यादा पुरानी नहीं है. मई का महीना था. मैं और मेरा परिवार गांव में गये हुए थे.

हमारे गांव में हमारा पुरखों का मकान है. मेरे भाई का परिवार वहीं गांव में ही रहता है. उसकी बीवी का नाम रंजना है.

मेरे भाई के दो बेटे हैं. छोटे वाला शहर में अपनी बीवी के साथ रहता है क्योंकि उसकी नौकरी वहीं है जबकि बड़े वाला बाहर जॉब करता है. वो महीने दो महीने में मुश्किल से एक बार घर आता है. रंजना की बड़ी पुत्रवधू का नाम निशा है. ये कहानी निशा बहू और मेरे बीच के सेक्स के रिश्ते की है.

उस दिन जब निशा बहू नहा के बाहर आई तो उसी समय मैं अंदर आया. मुझे देख कर वह शरमा गई और पर्दे के पीछे छिप गई, परंतु छिपने के पहले उसके गदराये बदन का दर्शन मुझे हो गया. उसका शरीर सोने जैसा चमक रहा था, जो मेरी आंखों में समा गया.

मेरी नजर बहू के शरीर को देखने के लिए लालायित हो गयी. उसकी चूची मेरी आंखों से छुप न सकीं. मेरा मन डोल गया था उसको देख कर। तन बदन में आग लगा दी उसने. अब आंखें उसके जिस्म के दीदार के लिये मचल गयी थीं जिनमें निशा के प्रति वासना ही वासना थी.

उस दिन के बाद से मैं उसको पटाने में लग गया. मैं निशा के आगे पीछे डोलता रहता था. किसी न किसी काम के बहाने उससे बात करने की कोशिश करता रहता था. यदि उसे कुछ सामान की जरूरत होती तो मैं झट से आगे आ जाता था.

मैं देख रहा था कि वो भी मेरे सामने आते ही शरमाने लगती थी. उसकी नजर भी मुझ पर मोहित सी दिखाई दे रही थी.
कई बार मैं उसके सामने अपनी पैंट में अपने लंड को खुजला देता था.

वो मेरे इशारे समझने लगी थी. अब आगे बढ़ने का समय आ गया था. उस पर अपनी वासना का आक्रमण करना आवश्यक हो गया था अब.

इसके लिए मैंने पिकनिक जाने की योजना बनाई. उसके लिए एक मिनी बस बुक कर दी गयी. पिकनिक जाने के दिन हम सब लोग तैयार थे और फिर सारी तैयारी करके गाड़ी में बैठने लगे. मौका पाकर मैंने निशा बहू के कान में धीरे से कह दिया कि गाड़ी की पीछे वाली आखिरी सीट पर ही बैठे.

उसने वैसा ही किया. सब को बिठाने के बाद मैं सामान वगैरह सेट करवा कर मैं खुद भी पीछे की ओर चला गया.

मैं और निशा मतलब ससुर बहू अगल बगल में ही बैठे हुए थे. मैंने उसके शरीर से अपने शरीर को स्पर्श करना शुरू किया. उसने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. वो चुपचाप बैठी हुई थी.

मैं अपना पैर उसके कोमल पर पैर पर घिस रहा था. उसको थोड़ी बेचैनी होने लगी तो वो शरमा कर यहां वहां नजर दौड़ाने लगी. भले ही मैं अपनी ओर से आश्वस्त था कि निशा के मन में भी मेरे लिये आकर्षण है लेकिन उसके लिए यह सब हरकतें इतनी आसानी से स्वीकार करना सरल नहीं था क्योंकि वो थी तो एक स्त्री ही. इसलिए थोड़ी घबराहट हो रही थी उसे.

वो बार बार इधर उधर नजर दौड़ा कर ये सुनिश्चित कर रही थी कि कोई हम दोनों को ये हरकत करते हुए देख न रहा हो क्योंकि वो घर की इज्जत थी. उसके इस प्रयास से ये तो साफ हो गया था कि वो भी कुछ करना चाहती है.

फिर मैंने अपना हाथ उसकी जांघों पर रख दिया. उसने तब भी कोई आपत्ति नहीं की. वो खिड़की से बाहर देखती रही. इस मौके का मैंने फायदा उठाना चाहा. मेरे पास एक बैग था जिसको मैंने अपनी एक जांघ पर रख लिया. इससे हुआ यूं कि किसी को भी नीचे का कुछ दिख नहीं सकता था कि मेरा हाथ कहां रखा हुआ है.

अपने हाथ से मैंने निशा बहू की जांघ को सहलाना शुरू कर दिया. फिर आहिस्ता अहिस्ता से उसकी साड़ी को उसकी टांगों पर ऊपर की ओर खींच कर सरकाना शुरू कर दिया. मेरी नजर सामने सब लोगों को चेक कर रही थी और मेरा हाथ नीचे ही नीचे अपना काम कर रहा था.

धीरे-धीरे करते हुए मैंने उसकी साड़ी को उसकी जांघों तक ऊपर कर लिया. उसकी जांघें नंगी हो गयी थीं. मैंने धीरे-धीरे से उसकी नंगी जांघों को सहलाना शुरू कर दिया. उसकी जांघें बहुत ही कोमल थीं. निशा की सांसें अब तेज होने लगी थीं.

वो गर्म होने लगी थी. मैंने गाड़ी में नजर घुमा कर देखा तो सब लोग अपने अपने में व्यस्त थे. कोई फोन में लगा हुआ था तो कोई खाने पीने में और बातें करने में मशगूल था.

फिर मैंने अपने हाथ को धीरे धीरे ऊपर ले जाना शुरू किया. अब मेरा हाथ निशा की कोमल जांघों से ऊपर होता हुआ उसकी चूत की ओर प्रस्थान कर गया था. धीरे धीरे निशा की चूत के करीब पहुंचता जा रहा था मेरा हाथ और इसी फीलिंग के कारण मेरे लंड का बुरा हाल हो चुका था.

मेरा लौड़ा मेरे पजामे में उछल कूद कर रहा था. किसी तरह से मैं अपने लंड को ढका रखने की कोशिश भी कर रहा था. पहुंचते पहुंचते आखिरकार मेरे हाथ निशा की जांघों पर फंसी चड्डी से जा टकराया. उसकी कोमल चूत से दूरी अब कुछ ही सेंटीमीटर की रह गयी थी.

मैंने थोड़ी और हिम्मत की और उसकी चड्डी को लांघ कर मेरा हाथ उसकी चूत को छू गया. उसकी कोमल सी चूत को छूते ही पूरे बदन में तूफान उठने लगा. अब मुझसे रुका नहीं जा सकता था और मैंने उसकी चूत को उसकी चड्डी के ऊपर से ही सहलाना शुरू कर दिया. निशा अब काफी गर्म हो चुकी थी.

कुछ ही देर के बाद निशा की चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था जिसका गीलापन मुझे मेरी उंगलियों पर लग रहा था. अब मुझे उसकी चड्डी हम दोनों के मिलन में बहुत बड़ी अड़चन लगने लगी थी. मेरा हाथ उसकी चूत को चड्डी के नीचे से छूने के लिए बेताब था. मेरी हथेली उसकी चूत का स्पर्श पाने के लिए बेचैन थी. उसकी चूत में उंगली डालने का बहुत मन कर रहा था.

फिर मैंने आहिस्ता से उसकी चड्डी को एक तरफ कर दिया. उसकी चूत आसपास से गीली हो चुकी थी. मुझे बहुत ही मादक क्षण लगा ये जब मेरी उंगलियां उसकी चूत के पानी में भीग रही थीं. मैंने उसकी चूत को छेड़ा तो वो थोड़ी सी उचक गयी. उसकी चूचियां तेजी से हिल रही थीं क्योंकि उसकी सांसें बहुत तेजी से चल रही थीं.

मैंने उसकी चूत में उंगली दे दी और धीरे धीरे उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा. निशा आहिस्ता आहिस्ता से आवाजें करने लगी- अम्म … स्स … अम्म … कर रही थी वो. मगर आवाज काफी धीमी थी.
वो खुद को रोकने की कोशिश भी कर रही थी लेकिन उसकी चूत बहुत गर्म हो चुकी थी.

मैंने अब तेजी से उसकी चूत में उंगली अंदर बाहर करना शुरू कर दिया.

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उसका बदन तपने लगा और धीरे धीरे कांपने लगा. वो खुद को रोक नहीं पा रही थी. मैं तेजी से उंगली चला रहा था और वो मेरी जांघ पर अपने हाथ से दबाते हुए खुद को संभालने की कोशिश कर रही थी.

पांच मिनट हो चुकी थी उसकी चूत में उंगली चलते हुए. फिर उसका पूरा बदन एकदम से तेजी से कांपने लगा और उसकी चूत ने मेरे हाथ पर ढेर सारा पानी छोड़ दिया. मैंने फिर अपना हाथ बाहर निकाल लिया.

मेरे उंगलियां उसकी चूत के पानी से सराबोर हो गयी थीं. मैं अपने हाथ को सूंघने लगा. निशा की चूत की खुशबू हो गयी थी मेरे हाथ में. मैं निशा के सामने ही उसकी चूत की खुशबू लेने लगा और फिर मैंने अपनी उंगलियों को चाट लिया. ये देख कर वो शरमा गयी.

मैंने धीरे से उसके कान के पास अपना मुंह ले जाकर कहा- ये अमृत मुझे अब दोबारा कब मिलेगा?
वो बोली- जब आपका मन करे ले लेना.

बस, अब मेरा काम आधा बन चुका था और आधा ही बाकी रह गया था. उसकी चूत तक तो पहुंच गया था अब उसकी चूत में लंड देने का काम बाकी रह गया था. फिर हम पिकनिक वाली जगह पर पहुंच गये.

हम सब बस से उतर गये. उस दिन हम दोनों एक दूसरे को चोरी चोरी देख रहे थे. मैं भी निशा के बदन की गोलाइयों को नाप रहा था और वो भी मेरे बदन का नाप ले रही थी.

पूरा दिन घूमने के बाद हम लोग थक चुके थे. उसके बाद हम लोग वहां से वापसी के लिए निकल लिये. अब थकावट काफी हो चुकी थी. फिर हम घर पहुंच गये. सब लोग नहा धो लिये और आराम करने के लिए जाने लगे. उसके बाद शाम का खाना हुआ और सबने खाना खा लिया.

फिर सोने की तैयारी होने लगी. सब अपने अपने बिस्तर पर पहुंच गये. सब थके हुए थे इसलिए सबको जल्दी ही नींद भी आ गयी. सब लोग हॉलनुमा कमरे में ही पड़े हुए थे जो कि काफी बड़ा था. सब लोग खर्रांटे लेने लगे. मगर मेरा लंड मुझे सोने नहीं दे रहा था.

रात के 1.30 बजे का टाइम हो गया था और मैं बेचैनी में करवटें बदल रहा था. निशा की चूत के वो विचार मुझे लेटने नहीं दे रहे थे. मेरा लंड उछल उछल कर दर्द कर रहा था. फिर मैं उठ कर पेशाब करने के लिए जाने लगा.

मैंने चारों ओर नजर घुमा कर देखी तो सब लोग गहरी नींद में थे. मैं बाथरूम की ओर गया. जाते हुए मैंने निशा की ओर देखा. उसके अगल बगल में काफी जगह थी. सभी औरतें एक तरफ लेटी हुई थी.

सही मौका देख कर मैं भी निशा के पास पहुंच गया. शायद उसको भी पूरा यकीन था कि मैं जरूर आऊंगा. उसके करीब काफी जगह थी. मैं जाकर उसकी कमर के पास बैठ गया. मैंने देखा कि उसकी साड़ी घुटने तक ऊपर उठ गयी थी.

उसकी साड़ी को मैंने और भी ज्यादा ऊपर तक उठा दिया. नीचे से निशा ने कुछ भी नहीं पहना हुआ था. मैंने साड़ी को पूरी ऊपर कर दिया और निशा की नंगी चूत मेरी आंखों के सामने थी. अपनी आंखों के सामने उसकी चूत को देख कर मुझे पागलपन चढ़ने लगा.

मुझे डर भी लग रहा था क्योंकि बाकी लोग भी बगल में ही सोये हुए थे. मगर रोमांच इतना था कि हिम्मत भी साथ साथ बढ़ रही थी. एक बात मैंने देखी कि निशा ने अपनी चूत को साफ किया हुआ था. गांव में रहते हुए भी वो शहरी लड़की की तरह एकदम टिप-टॉप रहती थी.

धीरे से मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया. उसने थोड़ी सी हलचल की और फिर शांत हो गयी. मैंने धीरे से उसकी चूत की पंखुड़ियों को खोल कर देखा और फिर फैला दिया.

मैंने एक उंगली उसकी चूत के दाने पर रख दी और उसको सहलाने लगा. निशा के पूरे बदन में हरकत होने लगी थी लेकिन वो अभी भी सोने का नाटक कर रही थी. मुझे भी ये खेल खेलने में काफी मजा आ रहा था.

निशा बहू की चूत का दाना सहलाते हुए मैंने एक उंगली उसकी चूत के अंदर घुसा दी. उसके मुंह से आह्ह निकल गयी. मैंने तुरंत अपने हाथ से उसका मुंह बंद किया. एक बार तो मेरी भी जान निकल गयी क्योंकि बाकी लोगों के उठने का डर था.

कुछ पल का विराम देकर मैंने उसके मुंह पर हाथ रखे हुए उसकी चूत में उंगली को चलाना चालू रखा. उसे भी मजा आ रहा था. अब उसने अपनी आंखें खोल ली थीं. वो मदहोशी में मेरी ओर देख रही थी. उसकी आंखों में सेक्स का एक नशा सा भर आया था.

मैं उसकी चूत को अपनी उंगली से जोर जोर से रगड़ने लगा. वो अपनी चूत को ऊपर करने लगी. मैं समझ गया कि अब बात निशा के काबू से बाहर जा रही है. इतने में ही वो उठने लगी.

उसने मेरा हाथ पकड़ा और मेरे होंठों पर उंगली से मुझे चुप रख कर कमरे में अंदर ले जाने लगी. वो आगे आगे थी और मैं पीछे पीछे. हम अंदर वाले कमरे में चले गये. सब लोग बाहर सो रहे थे.

जाते ही निशा ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और बेड पर मेरे साथ लेटते हुए नीचे आ गयी. मैं भी उसके ऊपर लेट गया. उसने मेरे होंठों को जोर जोर से चूसना शुरू कर दिया और मैं भी उसका साथ देने लगा. दोनों एक दूसरे के मुंह से लार को खींचने लगे.

फिर मैंने इसी दौरान उसके ब्लाउज को खोलना शुरू कर दिया. उससे लिपटते चूमते हुए मैंने उसके ब्लाउज के हुक खोल डाले. उसकी चूचियां नंगी हो गयीं. एकदम दूध के जैसी सफेद चूचियां थी उसकी. मैंने बिना देर किये उनको मुंह में भर लिया और जोर जोर से पीने लगा.

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निशा सिसकारने लगी और मेरे सिर को अपनी छाती की ओर दबाने लगी. मैं उसके निप्पलों को दांतों से काटने लगा. दो मिनट तक उसके बूब्स को चूसने और पीने के बाद मैंने उसके पेटीकोट भी खोल दिया. मैंने बहू को पूरी नंगी कर दिया.

उसके बाद मैंने भी जल्दी से अपने कपड़े निकाले और नंगा हो गया. मैंने बहू के दोनों पैरों को खोल दिया और उनके बीच में चला गया. मैंने बहू की चूत पर मुंह लगाया और जोर जोर से चूसने लगा.

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वो एकदम से सिहर कर सिमटने लगी. अपनी जांघों को भींचने की कोशिश करने लगी. मगर मैंने उसकी जांघों को दोनों हाथों से खोला हुआ था.

मैं जोर जोर से बहू की चूत में मुंह देकर चूस रहा था. फिर उसने अपनी जांघें खुद ही ढीली छोड़ दीं और चूत चुसवाने का मजा लेने लगी. मैंने उसकी चूचियों को पकड़ लिया और दोनों हाथों से दोनों चूचियों को दबाने लगा. वो मदहोश होने लगी.

अब मैंने अपने लंड को उसकी चूत पर लगाया और रगड़ने लगा. वो सिसकारने लगी. मगर मंद मंद आवाजें कर रही थी. मैं उसकी चूत के दाने पर अपने लंड को रगड़ रहा था.

उसकी चूत एकदम से चिकनी हो गयी थी. उसकी चूत से निकला कामरस और मेरे लंड से निकला कामरस दोनों के ही मिल जाने से उसकी चूत काफी गीली लग रही थी और एकदम से फिसलन भरी हो गयी थी.

जब उससे रहा न गया तो बोली- जल्दी करो, कोई आ जायेगा.
निशा अब मेरा लंड लेने के लिए तड़प गयी थी. लंड को बहू की चूत के छेद पर सेट करके मैंने एक धक्का दिया तो आधा लंड अंदर चला गया.

शादीशुदा होने के बावजूद भी निशा बहू की चूत ऐसी टाइट लग रही थी जैसे कुंवारी चूत ही हो. उसके पति को शायद ज्यादा समय नहीं मिलता था उसकी चूत को चोदने के लिए, इसी वजह से वो इतनी जल्दी अपनी चूत मुझसे चुदवाने के लिए तैयार हो गयी थी.

मैंने दूसरा झटका दिया तो उसके मुंह से आह्ह निकल गयी और मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया.
वो धीरे से कान में कराहते हुए बोली- आह्ह, दर्द हो रहा है, धीरे करो.
मैंने आहिस्ता आहिस्ता से निशा बहू की चूत को चोदना शुरू किया.

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फिर मैंने अपनी चोदने की गति बढ़ा दी. वो भी नीचे से सहयोग देने लगी. जब बहू की चूत में मेरे लंड के धक्के लग रहे थे तो उसकी गोल गोल बॉल के जैसी सफेद चूचियां आगे पीछे डोल रही थीं. उसकी चूचियों पर हल्के भूरे रंग के निप्पल एकदम से तने हुए थे.

मैं जोर जोर उसको चोदने लगा. उसकी आंखें बंद होने लगी थीं और मैं भी जैसे सातवें आसमान पर था. 15 मिनट तक निशा बहू की चूत की चुदाई चली और फिर अचानक से थरथराती हुई झड़ गयी. मगर मैं अभी भी उसी रफ्तार से उसकी चूत को चोदता रहा.

फिर उसके पांच मिनट के बाद मेरे लंड से भी वीर्य निकल पड़ा और मैंने सारा माल उसकी चूत में उगल दिया. मैं भी हांफता हुआ उसके ऊपर गिर गया. मैं बुरी तरीके से हांफ रहा था और निशा की सांसें भी सामान्य नहीं हो पाई थी.

थोड़ा शांत होने पर मैं उठा और बाहर का जायजा लेने के लिए गया. मैंने देखा कि सब लोग अभी भी घोड़े बेच कर सो रहे थे. वापस आकर मैंने फिर से उसकी चूत को कुरेदना शुरू कर दिया. फिर थोड़ी देर के बाद वो भी लय में आ गयी.

अबकी बार मैंने निशा को घोड़ी बना लिया. मैंने अपना औजार पीछे से उसकी चूत में डाला और चोदने लगा. वो भी मेरा साथ देने लगी. आधे घंटे तक मैंने दूसरे राउंड की चुदाई की. उसकी चूत चुद चुद कर लाल हो गयी थी. फिर आखिरकार मैंने फिर से एक बार अपना माल उसकी चूत में छोड़ा. इस दौरान वो तीन बार झड़ गयी थी.

फिर मैंने बाथरूम में जाकर खुद को साफ किया. उसके बाद निशा भी वहीं जाकर लेट गयी जहां पहले लेटी हुई थी. फिर मैं भी आराम से आकर सो गया.

सुबह फिर मैं देर से उठा. उस वक्त घर के सभी लोग अपने काम में लगे हुए थे.

मैं निशा को ढूंढ रहा था. वो कहीं नजर नहीं आ रही थी.

फिर दो मिनट बाद मैंने उसको किचन में खड़े हुए देखा. मुझे देखते ही वो शरमाने लगी.

रंजना भी उसके बगल में ही काम कर रही थी. मुझे देख कर रंजना ने कहा कि इनको नाश्ता दे दो.

उसके बाद मैं अपने रूम में गया और फ्रेश हो गया. थोड़ी देर के बाद निशा भी नाश्ता लेकर आ गयी.
चाय नाश्ता मुझे पकड़ाते हुए बोली- कल की रात मेरी जिन्दगी की बहुत ही खूबसूरत रात थी.
मैंने उसको धन्यवाद कहा.
वो बोली- नहीं, ये तो मेरा सौभाग्य था.

मैं बोला- अब तुम्हारी चूत के झरने का पानी पीने के लिए मुझे दोबारा कब मिलेगा?
निशा बोली- अब तो आप इसके मालिक हो गये. जब आपके दिल किया करे आप मिलने आ जाइयेगा. जब भी कहोगे इसका पानी आपको मिल जायेगा. मगर केवल आप और मैं. इसके अलावा कोई और नहीं.

इस तरह से मैं पांच दिन वहां रहा और मैंने निशा बहू की चूत कई बार बजाई. उसके बाद मैं अपने घर आ गया. मगर जब भी मैं जाता हूं तो वो मेरी राह देख रही होती है. निशा को जैसे अपने अकेलेपन का सहारा मिल गया.

आपको मेरी यह ससुर बहू सेक्स स्टोरी कैसी लगी मुझे इसके बारे में अपनी राय और विचार बतायें. नीचे दी गई ईमेल अपने मैसेज करें अथवा कमेंट बॉक्स में भी अपनी राय बता सकते हैं. धन्यवाद और आपको मेरी यह सच्ची सेक्स घटना कैसी लगी मुझे instargram पर ज़रूर बताये

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Father in law put finger in 1st daughter-in-law’s pussy Best Antarvasna Story

Best Antarvasna Story: I went to my village brother. My attention went to my nephew’s young wife there. His eyes also seemed full of lust. Enjoy this story of father-in-law’s daughter-in-law sex.

Hello friends, I am going to tell the true incident of Vishu my father-in-law daughter-in-law sex.
The matter is not very old. It was the month of May. Me and my family went to the village Best Antarvasna Story.

We have a ancestral house in our village. My brother’s family lives in the same village. Her wife’s name is Ranjana.

My brother has two sons. The younger one stays in the city with his wife because his job is there, while the older one works outside. He comes home barely once in two months. Nisha is the elder daughter-in-law of Ranjana. This story is about the sex relationship between Nisha Bahu and me Best Antarvasna Story.

That day when Nisha Bahu came out of the shower, I came in at the same time. On seeing me, she was ashamed and hid behind the curtain, but before hiding, I saw her dead body. His body was shining like gold, which dissolved in my eyes Best Antarvasna Story.

My eyes became eager to see the daughter-in-law’s body. Her nipple could not hide from my eyes. My mind was shocked after seeing that. He set his body on fire. Now the eyes were bent for the look of her body, in which lust was lust for Nisha Best Antarvasna Story.

From that day onwards, I started impressing him. I used to keep scolding in front of Nisha. Used to try to talk to him on the pretext of some work. If he needed some stuff, I would have come quickly Best Antarvasna Story.

I was seeing that she also started blushing as soon as she came in front of me. His eyes were also fascinated by me.
Many times I used to scratch my cock in my pants in front of him Best Antarvasna Story.

She was beginning to understand my gestures. It was time to move on. It was necessary to attack him with his lust now.

For this I planned to go for a picnic. A mini bus was booked for him. On the day of going to the picnic, we were all ready and then after making all preparations started sitting in the car. On getting the chance, I gently told Nisha Bahu’s ear that he sat on the last seat in the back of the car Best Antarvasna Story.

He did exactly the same. After making everyone sit, I got myself set up and so on. I myself went backwards.

Me and Nisha mean father-in-law daughter-in-law were sitting next to her. I started touching her body with her body. He also did not respond. She was sitting quietly Best Antarvasna Story.

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I was rubbing my feet on her soft feet. When she started getting a little restless, she blushed and started to look here and there. Even though I was convinced from my part that Nisha has an attraction for me too, but it was not easy for her to accept all these things so easily because she was a woman. So he was getting a little nervous Best Antarvasna Story.

She ran around here and again and again, making sure that no one was watching the two of us doing this act because she was a respecter of the house. It was clear from her efforts that she also wants to do something Best Antarvasna Story.

Then I put my hand on her thighs. He still did not object. She kept looking outside the window. I wanted to take advantage of this opportunity. I had a bag which I kept on one of my thighs. It happened that no one could see below where my hand is placed Best Antarvasna Story.

With my hand I started caressing Nisha Bahu’s thigh. Then slowly she slowly moved her sari upwards on her legs and started moving. My eyes were checking all the people in front and my hand was doing its work down below Best Antarvasna Story.

While doing slowly, I lifted her sari up to her thighs. His thighs were naked. I slowly started caressing her naked thighs. His thighs were very soft. Nisha’s breath was now intensifying.

She was starting to get hot. When I looked around in the car, everyone was busy with himself. Some were engaged in the phone, some were busy eating, drinking and talking Best Antarvasna Story.

Then I started moving my hand slowly. Now my hand was above Nisha’s soft thighs and had moved towards her pussy. Gradually, my hand was getting closer to Nisha’s pussy and due to this feeling, my cock was in bad condition Best Antarvasna Story.

My Aloda was jumping around in my pajamas. Somehow I was also trying to keep my cock covered. On reaching, finally, my hand hit the tights stuck on Nisha’s thighs. The distance from her soft pussy was now just a few centimeters Best Antarvasna Story.

I dared a little more and crossed his trunks and touched my hand. As soon as he touched her soft pussy, a storm began to rise throughout his body. Now I could not be stopped and I started caressing her pussy from the top of her tights. Nisha was very hot now Best Antarvasna Story.

After a while, Nisha’s pussy started leaving water, whose wetness was felt on my fingers. Now I started feeling a big hurdle between his trunks. My hand was desperate to touch her pussy from under the tights. My palm was restless to get a touch of her pussy. Was feeling very much like putting a finger in her pussy Best Antarvasna Story.

Then I gently put her tights aside. Her pussy was wet from around. I felt a very intoxicating moment when my fingers were getting wet in her pussy water. When I teased her pussy, she got a little shrug. Her tits were moving fast because her breath was moving very fast Best Antarvasna Story.

I gave her finger in her pussy and slowly started inside her pussy. Nisha slowly started voicing her slowly – Amm… Sss… Amm… she was doing it. But the voice was very slow.
She was also trying to stop herself, but her pussy was very hot Best Antarvasna Story.

I now started to finger inside her pussy fast.

His body began to heat up and trembled slowly. She could not stop herself. I was moving my finger fast and she was trying to handle herself while pressing with my hand on my thigh Best Antarvasna Story.

It had been five minutes while walking in her pussy. Then his whole body started trembling very fast and his pussy left a lot of water on my hand. I then took out my hand.

My fingers were wet with her pussy water. I started sniffing my hand. Nisha’s pussy scent was in my hand. I started taking the scent of her pussy in front of Nisha and then I licked my fingers. She blushed upon seeing this Best Antarvasna Story.

I gently moved my mouth near his ear and said- When will I get this nectar again?
She said – When you feel like taking it.

Just now, my work was half done and half was left. Had reached her pussy, now the work of giving cocks in her pussy was left. Then we reached the picnic spot Best Antarvasna Story.

We all got off the bus. That day, we both saw each other stealing. I was also measuring the body of Nisha’s body and she was also measuring my body.

We were tired after roaming all day. After that we set out to return from there. Now exhaustion was enough. Then we reached home. Everyone took a shower and started going to rest. After that there was evening meal and everyone ate the food Best Antarvasna Story.

Then started preparing for sleep. Everyone reached their respective bed. Everyone was tired, so everyone soon fell asleep. Everyone was lying in a hallowed room which was quite big. Everyone started snoring. But my cock was not letting me sleep Best Antarvasna Story.

It was past 1.30 in the night and I was turning to restlessness. Those thoughts of Nisha’s pussy were not letting me lie down. My cock was aching by bouncing. Then I got up and started going to pee Best Antarvasna Story.

When I looked around, everyone was in deep sleep. I went to the bathroom. On the way, I looked at Nisha. There was plenty of space next to it. All the women were lying on one side Best Antarvasna Story.

Seeing the right opportunity, I also reached Nisha. Perhaps he was also sure that I would definitely come. There was a lot of space near him. I went and sat near his waist. I saw that her sari was up to her knees Best Antarvasna Story.

I lifted her sari even higher. Nisha was not wearing anything from below. I put the saree all over and Nisha’s naked pussy was in front of my eyes. Seeing her pussy in front of my eyes, I started to go mad Best Antarvasna Story.

I was also afraid because the rest of the people were sleeping next door. But the thrill was so much that the courage was also increasing along with it. One thing I noticed was that Nisha cleaned her pussy. Even while living in the village, she was very tip-top like an urban girl Best Antarvasna Story.

Slowly I put my hand on her pussy. He stirred a bit and then calmed down. I slowly opened the petals of her pussy and then spread it.

I put a finger on the grain of her pussy and started caressing her. Nisha’s whole body began to move, but she was still pretending to sleep. I too was enjoying playing this game Best Antarvasna Story.

While stroking Nisha Bahu’s pussy, I inserted a finger inside her pussy. Sighs came out of his mouth. I immediately closed his mouth with my hand. Once, I too lost my life because the rest of the people feared to rise Best Antarvasna Story.

After pausing for a few moments, I kept moving my finger in her pussy while placing my hand on her mouth. He was also enjoying it. Now he had opened his eyes. She was looking at me in a trance. There was a bit of sex addiction in his eyes Best Antarvasna Story.

I started rubbing her pussy vigorously with my finger. She started up her pussy. I understood that now the matter is going out of Nisha’s control. In due course she started getting up.

He held my hand and kept me silent with a finger on my lips and took me inside the room. She was ahead and I followed behind. We went to the inside room. Everyone was sleeping outside Best Antarvasna Story.

As soon as I left, Nisha pulled me over her and came down while lying with me on the bed. I also lay down on him. He started sucking my lips harder and I also started supporting him. Both started pulling saliva from each other’s mouth Best Antarvasna Story.

Then I started unbuttoning her blouse. Kissing her, I unbuttoned her blouse hook. Her Tits became naked. He had white teats like milk. Without delay I filled them in the mouth and started drinking loudly Best Antarvasna Story.

Nisha sighed and started pressing my head towards her chest. I started biting her nipples with teeth. After sucking and drinking her boobs for two minutes, I also opened her petticoat. I bare the daughter-in-law completely Best Antarvasna Story.

After that I quickly took off my clothes and got naked. I opened both the daughter-in-law’s legs and went between them. I put my mouth on the daughter-in-law’s pussy and started sucking hard.

She shuddered right away. Started trying to wet her thighs. But I opened her thighs with both hands.

I was sucking my daughter’s pussy very loudly. Then she left her thighs loose on her own and started enjoying pussy licking. I caught her nipples and pressed both hands with both hands. She started getting drunk Best Antarvasna Story.

Now I put my cock on her pussy and started rubbing it. She started giggling. But she was making low noise. I was rubbing my cock on her pussy.

Her pussy was absolutely smooth. Due to the combination of both Kamaras coming out of her pussy and Kamaras coming out of my cocks, her pussy looked quite wet and became very slippery Best Antarvasna Story.

When he was no more than that, then bid – hurry, someone will come.
Nisha now yearned to get my cock. Setting the cocks on the holes of the daughter-in-law’s pussy, I pushed one, then half the cocks went inside Best Antarvasna Story.

Despite being married, Nisha Bahu’s pussy looked like such a virgin pussy. Her husband probably did not get much time to fuck her pussy, that is why she agreed to fuck her pussy with me so soon Best Antarvasna Story.

When I gave another blow, a sigh came out of his mouth and my whole cock penetrated his pussy.
He softly groaned in the ear and said- Ahhh, it is hurting, slow down.
I started fucking Nisha Bahu’s pussy slowly Best Antarvasna Story.

Then I increased my speed of fucking. She also started supporting from below. When my cock was getting hit in the daughter-in-law’s pussy, her white balls like a round ball were drooping back and forth. The light brown nipples on her nipples were absolutely taut Best Antarvasna Story.

I started fucking him very hard. His eyes were closing and I was like on the seventh sky. For 15 minutes, Nisha Bahu’s pussy licked and then suddenly fell trembling. But I still kept fucking her pussy at the same pace Best Antarvasna Story.

Then after five minutes, semen came out of my cock too and I spilled all the material in her pussy. I also fell on him panting. I was panting badly and Nisha’s breath was not normal.

After getting a bit quiet, I got up and went to take stock of the outside. I noticed that everyone was still sleeping on horses. After coming back, I started scrape her pussy again. Then after a while, she too came into rhythm Best Antarvasna Story.

This time I made Nisha a mare. I put my tool in her pussy from behind and started fucking. She also started supporting me. For half an hour I fuck the second round. Her pussy had become red by fucking herself. Then finally I once again left my goods in her pussy. During this time, she had to fall three times.

Then I went to the bathroom and cleaned myself. After that Nisha also went to where she was lying down. Then I also came and slept comfortably.

Then I woke up late in the morning. At that time all the people of the house were engaged in their work.

I was looking for Nisha. She could not be seen anywhere Best Antarvasna Story.

Then two minutes later I saw him standing in the kitchen. She started blushing when I saw her.

Ranjana was also working next to him. On seeing me, Ranjana said that give them breakfast.

After that I went to my room and got fresh. After a while, Nisha also brought breakfast.
Tea breakfast while grabbing me, said – Last night was a very beautiful night of my life.
I said thank you to him Best Antarvasna Story.
She said- No, it was my good fortune.

I said – now when will I get your pussy water to drink water again?
Nisha said – now you own it. When you do your heart, you will come to meet. You will get water whenever you say it. But only you and me. Apart from this no one else Best Antarvasna Story.

In this way I stayed there for five days and I played Nisha Bahu’s pussy many times. After that I came to my house. But whenever I go, she is looking at my path. Like Nisha got support of her loneliness Best Antarvasna Story.

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