Antarvasna Hindi me मुंह बोली बेटी की सील तोड़ी 1 Best sex

मुंहबोली बेटी की सील तोड़ी Antarvasna Hindi me

Antarvasna Hindi me: मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई से आगे की कहानी. जब मेरी आँख खुली तो उस वक्त साढ़े दस बज रहे थे। रूपा बिस्तर पर नहीं थी। मगर रात को मैंने जो उसका ब्रा और पेंटी उतार के फेंकी थी, तो अभी भी फर्श पर पड़े थे। बेशक मैं चादर लेकर लेटा था, मगर चादर के अंदर तो मैं बिल्कुल नंगा था और सुबह सुबह मेरा लंड भी पूरा अकड़ा हुआ था।

तभी कमरे में दिव्या आई और मुझे गुड मॉर्निंग पापा बोल कर चाय का कप मेरे सिरहाने रखा।
एक बार तो मुझे बड़ी शर्म आई, अरे भाई अपनी बेटी के सामने मैं नंगा था और मेरे तने हुये लंड ने चादर को तम्बू बना रखा था जो दिव्या ने देख भी लिया था।

चाय रख कर दिव्या ने फर्श पर पड़े अपनी मम्मी के ब्रा पेंटी उठाए और चली गई।
मैं चाय पीते सोचने लगा, ये लड़की क्या सोच रही होगी कि इसके माँ को कोई गैर मर्द सारी रात चोदता रहा। रूपा की चीखें, सिसकारियाँ, सब इसने भी तो सुनी होगी। मगर मैंने इस बात को अनदेखा कर दिया।

चाय पीकर मैं उठा और बाथरूम में चला गया। नहा कर तैयार होकर मैं नीचे आया तो रूपा पूरी तरह से नहा धोकर सज संवर कर तैयार खड़ी थी।

मेरे आते ही उसने अपनी बेटियों के सामने मेरे पाँव छूये, उसके बाद उसने नाश्ता लगाया, हम चारों ने नाश्ता किया, मगर मैंने देखा दोनों लड़कियों के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी।

उस दिन मेरी छुट्टी थी तो उस दिन दोपहर को भी मैंने एक बार रूपा को चोदा, रात को फिर वही सब कुछ हुआ।

अभी रम्या कुछ शांत थी मगर दिव्या इस बात से बहुत खुश थी, वो अपनी खुशी की इज़हार मुझे कई बार चूम कर चुकी थी। हर वक्त पापा पापा करके मेरे आस पास ही रहती थी।

उससे अगले दिन दिव्या मेरे सर में तेल लगा रही थी, मैं अपने मोबाइल पर कुछ देख रहा था। जब वो तेल लगा चुकी, तो मैंने लेटना चाहा, तो दिव्या ने अपनी गोद में ही मेरा सर रख लिया। मुझे इसमें कुछ अजीब नहीं लगा।
मैं बेखयाली में ही अपने मोबाइल में बिज़ी रहा कि अचानक दिव्या ने मेरे होंठ चूम लिए।

Antarvasna Hindi me

मैं एकदम से चौंक कर उठा। मैं बहुत हैरान था- दिव्या, ये क्या किया तुमने?
मैंने उससे पूछा।
वो बोली- आप मम्मी से इतना प्यार करते हो तो मैंने सोचा मैं आपका शुक्रिया कैसे अदा करूँ!
वो थोड़ा डरी हुई सी लगी।

मैंने कहा- पर बेटा, ये सब तो तुम्हारी मम्मी मुझे दे ही रही है, तुम्हें अलग से कुछ करने या देने की ज़रूरत नहीं है।
वो बोली- क्यों पापा, क्या मैं आपको अपनी तरफ से कुछ नहीं दे सकती?
मैंने कहा- पर बेटा, होंठों का चुम्बन तो उसके लिए होता है, जिसे आप बहुत ज़्यादा प्यार करते हो, वो इंसान आपकी बॉय फ्रेंड या पति हो।

दिव्या पहले तो चुप सी कर गई, फिर थोड़ा भुन्नाती हुई उठ कर जाती हुई बोली- आपकी मर्ज़ी आप जो भी समझो।

मेरे तो गोटे हलक में आ गए कि ‘अरे यार ये क्या हो रहा है, ये कल की लड़की भी देने को तैयार है।’
अब मेरे सामने दिक्कत यह थी कि शुरू से ही मैं दिव्या को अपनी बेटी कहता और समझता आया हूँ, तो उसके साथ ये सब? नहीं नहीं … ऐसे कैसे हो सकता है? उसे मैं समझाऊँगा।

उसके बाद मैंने 2-3 बार दिव्या को समझाने की कोशिश करी मगर इसका उल्टा ही असर हुआ और दिव्या ने ही खुद ही इकरार कर लिया कि वो मुझसे प्यार करती है।
मैंने कहा भी- पर तुम तो मुझे पापा कहती हो?
वो बोली- ओ के, आज बाद नहीं कहूँगी।
मैंने बहुत समझाया मगर वो लड़की ज़िद पर ही अड़ गई।

मैंने उसे ये भी कहा- तुमने तो मुझसे वादा लिया था कि मैं तुम्हारी मम्मी से कभी धोखा नहीं करूंगा और अब तुम ही उस वादे को तोड़ने के लिए मुझे उकसा रही हो?
मगर लड़की नहीं मानी और बोली- भाड़ में जाए मम्मी। आई लव यू तो मतलब आई लव यू!

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मेरे लिए बड़ी कश्मकश थी मगर फिर मैंने सोचा ‘यार क्यों किसी का दिल दुखाऊँ? कौन सा मेरी अपनी बेटी है और कौन सा मैं उसका असली बाप हूँ। असली बाप असली होता है और नकली बाप नकली होता है।’
बस ये विचार मन में आए और अगले ही पल मुझे वो 19 साल की अपनी बेटी, सेक्स के लिए पर्फेक्ट लगने लगी। मुझे एक ही पल में रूपा के बदन में बहुत सी कमियाँ, और दिव्या के कच्चे बदन में खूबियाँ ही खूबियाँ दिखने लगी।

उसके बाद जब भी मैं रूपा के घर जाता और दिव्या मुझसे गले मिलती तो मैं जानबूझ कर उसे अपने जिस्म से सटा लेता ताकि उसके नर्म नर्म मम्मे मेरे सीने से लगे और मुझे उसके कोमल कुँवारे जिस्म की गंध सूंघने को मिल सके।
रूपा समझती थी कि ये बाप बेटी का प्यार है मगर अब मेरी निगाह रूपा की बेटी के लिए बदल चुकी थी।

इस बीच एक दो बार मौका मिला जब मैं रूपा, दिव्या और रम्या को अपने साथ घुमाने के लिए ले गया। बेशक रूपा और लड़कियों ने जीन्स पहनी थी मगर फिर भी मैंने बाज़ार में घूमते हुये, दिव्या से कहा- जीन्स तो सब लड़कियां पहनती थीं, मगर आजकल तो निकर का फैशन है।
वो चहक कर बोली- तो पापा ले दो मुझे भी एक निकर।

मैं उन्हें एक दुकान में ले गया, वहाँ मैंने सबको जीन्स ले कर दी, मगर दिव्या के लिए खुद एक निकर पसंद की।
जब वो ट्राई रूम से निकर पहन कर बाहर निकली, तो मैंने उसकी गोरी गोरी खूबसूरत जांघों को घूरते हुये कहा- बेटा निकर तो ठीक है, मगर इसे पहनने के लिए तुम्हें अपनी वेक्सिंग भी करवानी होगी।
वो बोली- ये कौन सी बड़ी बात है, वो तो मम्मी भी कर देंगी।

हालांकि दिव्या की टाँगों पर कोई ज़्यादा बाल नहीं थे। मैंने उसे निकर पहन कर ही चलने को कहा। बाज़ार में बहुत से लोग उसे निकर में देख कर घूरते हुये जा रहे थे.
वो मुझसे बोली भी- पापा, सब मेरी टाँगें ही घूर रहे हैं।
मैंने कहा- तू परवाह मत कर, ये सब बस यही कर सकते हैं घूरते हैं तो घूरने दे। बल्कि तू यह सोच कि अगर तुम में कुछ खास बात है, तभी तो ये सब तुम्हें इतने ध्यान से देख रहे हैं।

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मेरी बात का दिव्या पर असर हुआ, और काफी उन्मुक्त हो कर बाज़ार में घूमी और घर आ कर मुझे लिपट कर मेरे गाल पर चूम कर बोली- सच में पापा, आज जितना मज़ा बाज़ार में घूम कर आया, पहले कभी नहीं आया।
मैंने मन में सोचा ‘अरे पगली, मैं तो तुझे दाना डाल रहा हूँ, तुझे इतना बिंदास बना रहा हूँ कि एक दिन या तो तो तू मुझसे चुदेगी, या फिर अपना कोई न कोई यार पटा लेगी और उससे अपनी फुद्दी मरवा कर आएगी। मैं तो तुझे एक तरह से बिगाड़ रहा हूँ।

मगर वो नादान कहाँ मेरी कुटिल चालों को समझ रही थी.
और रहा सवाल उसकी माँ का … उसकी फुद्दी में तो हर हफ्ते मैं अपना लंड फेरता था तो वो उस बुनतारे में उलझी थी। उसे भी नहीं पता था कि मैं न सिर्फ उसे बल्कि उसकी जवान हो रही बेटी पर निगाह रखे हूँ कि कब वो मेरे से चुदवाए।

मेरी कोशिशें रंग ला रही थी, दिव्या मेरे और करीब, और करीब आती जा रही थी। बढ़ते बढ़ते बात यहाँ तक बढ़ गई कि बातों बातों में मैंने उसे यह बात बता दी थी कि मुझे उसका प्यार मंजूर है।

एक दिन मौका मिला, जब मैं और दिव्या अकेले बैठे थे तो मैंने दिव्या से कहा- दिव्या एक बार कहूँ?
वो बोली- हाँ पापा?
मैंने कहा- यार उस दिन जो तुमने किस किया था, बहुत छोटा सा था, मज़ा नहीं आया, एक और मिलेगा?
दिव्या ने शर्मा कर मेरी और देखा और बोली- फ्री में ही?
मैंने कहा- तो बोल मेरी जान क्या चाहिए?

वो बोली तो कुछ नहीं पर थोड़ा दूर जा कर दीवार की तरफ मुंह करके खड़ी हो गई। मैं भी उठ कर उसके पीछे गया, और उसे पीछे से ही अपनी बांहों में भर लिया, उसे अपनी ओर घुमाया और उसका चेहरा ऊपर को उठा कर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये।

उस लड़की ने कोई विरोध नहीं किया और मैंने बड़े अच्छे से उसके दोनों होंठ चूसे, न सिर्फ होंठ चूसे बल्कि उसके छोटे छोटे मम्मे भी दबा दिये। उसके बाद वो जब मेरी गिरफ्त से छूट कर भागी तो एक बार दरवाजे के पास जा कर रुकी, मुड़ के पीछे देखा, एक बड़ी सारी स्माइल दी और फिर भाग गई।

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मैं तो खुशी के मारे बिस्तर पर ही गिर गया, माँ भी सेट, बेटी भी सेट। अब मैं अपने मन में दिव्या को चोदने के सपने बुनने लगा।

मगर एक बात मुझे अभी तक समझ नहीं आई थी कि दिव्या तो कॉलेज में पढ़ती है, उसके साथ बहुत से लड़के भी पढ़ते होंगे, तो वो अपने हमउम्र किसी लड़के से क्यों नहीं पटी?
मैं तो उम्र में उसके बाप से भी बड़ा था, फिर मुझमे उसे क्या दिखा?

मगर ये बात ज़रूर थी कि अब मेरे दोनों हाथों में लड्डू थे, जब जिसको भी मौका मिलता उसी को मैं पकड़ लेता। दो चार दिन में ही मैंने दिव्या के जिस्म के हर अंग को छू कर देख लिया। बल्कि एक उसे कहा- दिव्या, मैं तुम्हें बिल्कुल नंगी देखना चाहता हूँ।
तो वो बाथरूम में गई और अंदर उसने अपने सारे कपड़े उतारे और फिर थोड़ा सा दरवाजा खोल कर बाहर देखा.

बाहर कमरे में मैं अकेला था, रूपा और रम्या नीचे रसोई में थी। मैंने उसे इशारा किया तो दिव्या बाथरूम से निकल कर बिल्कुल मेरे सामने आ गई।
19 साल की दिव्या काया वाली खूबसूरत पतली दुबली लड़की। मगर उसके खड़े मम्मे, और कसे हुये चूतड़ मुझे दीवाना बना गए, मैंने उसके दोनों मम्मों को और बाकी जिस्म को भी छूकर देखा।
मेरा तो लंड तन गया मैंने उसे कहा- दिव्या, अब तुम्हें चोदना ही पड़ेगा।
वो बोली- पापा, आपकी बेटी हूँ, जब आपका दिल करे!
वो अपने छोटे छोटे चूतड़ मटकाती वापिस बाथरूम में चली गई।

उसके बाद वो फिर से कपड़े पहन कर आ गई।

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मैंने उससे पूछा- दिव्या एक बात बता, तू सुंदर हैं, तेरी क्लास में भी बहुत से लड़के तुम पर लाइन मारते होंगे, फिर तुझे मुझमें क्या दिखा और वैसे भी मेरा तो तेरी मम्मी के साथ चक्कर चल ही रहा है।

वो बोली- पापा, आप मुझे शुरू से ही अच्छे लगते थे, मगर हमारे बीच कुछ कुछ रिश्ता ही अलग बन गया, आप मेरे पापा बन गए और मैं आपकी बेटी बन गई। और उस रात जब आप हमारे घर रुके तो आप और मम्मी के बीच जो कुछ हुआ, वो हम दोनों बहनों ने सब सुना. सच कहती हूँ, मम्मी की सिसकारियाँ और चीखें सुन कर मैं इतनी उत्तेजित हो गई कि मैंने अपने हाथ से खुद को शांत किया। मेरा भी अक्सर दिल करता है कि जैसे आप मम्मी के साथ करते हो अगर मेरे साथ करते तो कैसा लगता, और ये सोचते सोचते मैं आप पर ही मर मिटी।

मैं खुद ये सोच रही थी के आपसे मैं ये बात कैसे कहूँ, मगर आप ने कह तो ठीक ठीक है, मुझे कहने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी, और आप मेरे बहुत प्यारे वाले पापा हो इस लिए मैं आपसे कुछ नहीं छुपआऊँगी। आप मुझसे कुछ भी पूछ सकते हो, कह सकते हो। अब जब बेटी ही नंगी हो गई हो, नकली बाप को क्या ज़रूरत पड़ी है, शराफत का ढोंग करने की।

मैंने कहा- मुझसे सेक्स करोगी दिव्या?
वो बोली- आप कुछ भी कर लो, मैं आपको मना नहीं करूंगी।

मैंने उसको चेक करने के लिए अपनी जीभ निकाली और सीधी दिव्या में मुंह में डाल दी और मेरी बेटी मेरी जीभ को चूस गई. उसके दोनों मम्मों को मैंने कस कस कर दबाया। मगर इससे ज़्यादा मैं उसके साथ और कुछ नहीं कर पा रहा था क्योंकि रूपा तो हमेशा ही घर में होती थी. और उसके होते मैं उसकी बेटी को कैसे चोद सकता था।

तड़प मैं पूरा रहा था कि कब मौका मिले और कब मैं इस कुँवारी कन्या के कोमल तन का भोग लगाऊँ। मगर अब रूपा को गले लगाना और चूमना तो मैं दिव्या के सामने भी कर लेता.
और वो भी देख देख कर मुसकुराती कि कैसे मैं उसकी माँ की जवानी को भोग रहा हूँ।
पता तो उसे भी था कि जब भी मौका मिलता है, मैं भी जम कर उसकी माँ को चोदता हूँ, अपनी माँ की चीखें सुन कर वो और भी उत्तेजित होती।

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फिर फिर एक दिन दिव्या का फोन आया- पापा, मम्मी और रम्या बाबाजी के दर्शन करने के लिए जा रहे हैं, मैंने अपने पेपर का झूठा बहाना लगा दिया और मैं नहीं जा रही।
मतलब वो घर में अकेली रहेगी, घर में।
मैं तो खुशी से उछल पड़ा।

जिस दिन रूपा और रम्या गई, मैं खुद उन दोनों को बस चढ़ा कर आया और कह कर आया- तुम चिंता मत करो, मैं दिव्या को अपने घर ले जाऊंगा।

मगर मैं उन्हें बस चढ़ा कर सबसे पहले रूपा के ही घर गया। वहाँ दिव्या बैठी थी, मैंने जाते ही उसे अपनी बांहों में भर लिया- ओह मेरी प्यारी बेटी!
कह कर मैंने उसके कई सारे चुम्बन ले लिए।
वो भी बड़ी खुश हुई- अरे पापा, ये क्या, आप को अधीर हो गए।
मैंने कहा- अरे मेरी जान, तेरे इस कच्चे कुँवारे जिस्म को देख कर कौन अधीर नहीं होगा।

मैंने उसे बहुत चूमा, उसके गाल चूस गया, उसके होंठ चूस गया।
फिर मैंने खुद को संभाला कि अरे यार ये कहाँ भाग चली है, शाम तक मेरे पास है, आराम से करते हैं।

मैंने दिव्या से कहा- बेटा एक काम करो।
वो बोली- जी पापा?
मैंने कहा- आज शाम को हम दोनों मेरे घर चलेंगे, मगर उससे पहले यहाँ हम वो सब कर लेंगे, जो हम इतने दिनों से अपने मन में सोच रहे थे. इसलिए मेरी इच्छा है कि अगर शाम तक हम दोनों इस घर में पूरी तरह से नंगे रह कर अपना समय गुजारें, ताकि मैं जी भर के तुम्हें अपनी आँखों से नंगी देख सकूँ।
वो बोली- आप तो मेरे पापा हो, आपकी बात मैं कैसे मना कर सकती हूँ।

जब वो अपने कपड़े खोलने के लिए उठी, तो मैंने उसे रोका और खुद उसी टी शर्ट, उसका लोअर, अंडर शर्ट और चड्डी उतार कर उसको नंगी किया और फिर खुद भी बिल्कुल नंगा हो गया।
बाप बेटी आज दोनों एक दूसरे के सामने नंगे खड़े थे।

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मैंने दिव्या को अपने कलेजे से लगा लिया। वो भी मुझसे चिपक गई और मेरा लंड हम दोनों के पेट के बीच में अपनी जगह बना कर ऊपर को उठ रहा था।

तब मैंने दिव्या के सारे जिस्म को चूमा, उसके मम्मे चूसे, उसके पेट, पीठ, जाघें सब जगह चूमा। उसकी फुद्दी भी चाटी, उसकी गांड भी चाट गया।

बेशक मैं सब कुछ आराम से करना चाहता था, मगर लालची इंसान को सब्र कहाँ … मैंने उसकी फुद्दी को अपनी अपनी जीभ से खूब चाटा, इतना चाटा कि वो पानी छोड़ने लगी और उसकी फुद्दी का नमकीन पानी मैं खूब मज़े ले लेकर चाट लिया।

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फिर मैंने उससे कहा- बेटा, पापा का लंड चूसोगी?
वो बोली- मैंने ये काम कभी नहीं किया, और सच पूछो तो मुझे ये सब गंदा लगता है।
मैंने कहा- ठीक है, मत चूसो, पर अगर दिल किया तो चूस लोगी?
वो बोली- पता नहीं पापा।

मैं जाकर दीवान पर सीधा लेट गया और उसे अपने ऊपर उल्टा लेटा लिया। अब मैंने उसकी दोनों टाँगें खोली, उसकी फुद्दी को अपने मुंह पर सेट किया और उसकी फुद्दी में जीभ लगाने से पहले मैंने उसे कहा- दिव्या बेटा, पापा का लंड अपने हाथ में पकड़ो और अपने मुंह के पास रखो, अगर दिल किया तो चूस लेना।

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मुझे पता था कि जब मैं इसकी फुद्दी इतनी चाटूंगा कि ये बहुत सारा पानी छोड़ने लगे, तो काम के आवेश में आकर ये लड़की खुद ही मेरा लंड चूस लेगी।

और हुआ भी यही … मुश्किल से मैंने दो तीन मिनट ही उसकी फुद्दी चाटी होगी, उसकी जांघों की जकड़ मेरे चेहरे पर और उसके हाथ की पकड़ मेरे लंड पर कस गई। और फिर मुझे हुआ एक कोमल अहसास!
उसके कोमल, गुलाबी होंठों का स्पर्श जब मेरे लंड के टोपे के इर्द गिर्द हुआ तो मेरा मन तो झूम उठा, मेरी बेटी मेरे लंड को अपने मुंह में ले चुकी थी। मुझे उसे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं पड़ी, वो खुद ही अपने अंदाज़ से मेरे लंड को चूसती चाटती रही।

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वो भी पूरी गर्म थी और मैं भी … फिर देर किस बात की!
मैंने उसे रोका, उसे दीवान पर सीधा लेटाया और बोला- देखो बेटा, अब मैं अपना लौड़ा तुम्हारी कुँवारी फुद्दी में डालूँगा। तुम्हारा पहली बार है, शायद थोड़ा दर्द हो, इसलिए, मेरी बेटी, अगर दर्द हुआ तो बता देना, हम रुक रुक कर लेंगे। पर इतना ज़रूर है कि आज मैं अपना पूरा लंड तुम्हारी फुद्दी में उतार देना चाहता हूँ, तुमने साथ दिया तो ठीक, नहीं तो ज़बरदस्ती ही सही।
वो बोली- पापा बस आराम से करना, ये तो मेरे मुंह में भी बड़ी मुश्किल से घुसा था। दर्द तो होगा ही, पर मैं बर्दाश्त करने की कोशिश करूंगी।

मैंने अपने लंड पर बहुत सारा थूक लगाया, उसे अच्छी तरह से गीला किया और फिर दिव्या की कुँवारी गुलाबी फुद्दी पर रखा।
एक बार तो दिल आया ‘अरे यार क्या बेटी जैसी लड़की की फाड़ रहा है, मगर फिर मैंने एक बार ऊपर को देखा और भगवान से कहा ‘बेशक मैं दुनिया की नज़र में गलत काम कर रहा हूँ, पर मेरी नज़र में ये ठीक है, इस लिए अपनी कृपा बनाए रखना और इस लड़की को सब सहने की शक्ति देना।

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और फिर मैंने अपनी कमर का ज़ोर लगाया, मेरा लौड़ा दिव्या की कुँवारी फुद्दी फाड़ कर अंदर घुस गया।
उसकी तो जैसे आँखें बाहर आ गई हों।
मेरे कंधों को पकड़ कर वो सिर्फ एक बार यही बोली- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … पापा… नहही!

मगर तब तक पापा के लंड का टोपा बेटी की फुद्दी में घुस चुका था। वो एकदम से जैसे सदमे में थी, मगर मैं पूरी तरह से काम से ग्रसित था. उसके दर्द की परवाह किए बिना मैंने और ज़ोर लगाया और अपने लंड को और उसकी फुद्दी में घुसेड़ा.

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मगर अब दिव्या के मुंह से कोई दर्दभरी चीख नहीं निकली, उसकी आँखें फटी हुई, और चेहरा फक्क पड़ा था और मैं ज़ोर लगा लगा कर अपने लंड को उसके जिस्म में पिरोने में लगा था।
जब तक दिव्या अपने होशो हवस में वापिस आई, तब तक मैंने अपना पूरा लंड उसकी फुद्दी में घुसेड़ दिया था.

मेरे मन में एक अजब सी खुशी थी, शायद 50 साल की उम्र में एक 19 साल की लड़की की सील तोड़ने की, या अपनी ही बेटी के साथ सेक्स करके मेरी इनसेस्ट सेक्स की इच्छा पूरी होने की, या अपनी ही माशूक की बेटी चोदने की, पता नहीं क्या था, मगर मैं बहुत खुश था।

उस लड़की के दर्द की परवाह नहीं थी, मुझे तो सिर्फ अपने ही दिल की ख़ुशी नज़र आ रही थी।

थोड़ा संभालने के बाद दिव्या बोली- पापा ये क्या कर दिया आपने?
मैंने पूछा- क्या हुआ बेटा?
वो बोली- पापा ऐसा लग रहा है, जैसे किसी ने मुझे बीच में से चीर दिया हो, तलवार से काट दिया हो। ऐसा लग रहा है, जैसे मैं मर जाऊँगी।
मैंने कहा- कुछ नहीं होगा बेटा, हर लड़की के साथ पहली बार ऐसा ही होता है। मगर अगली बार जब तुम सेक्स करोगी, तो तुम बहुत एंजॉय करोगी। बस ये पहली बार ही है, फिर नहीं होगा।

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वो लड़की बेसुध से मेरे नीचे लेटी रही। उसके चेहरे को देख कर लग रहा था कि उसे कुछ भी महसूस नहीं हो रहा है, सिवाय दर्द के! और मैं एक कामुक लंपट रंडीबाज़ मर्द, उस लड़की को किसी वेश्या की तरह भोगने में लगा था।

मैं नहीं रुका और उसे चोदता रहा तब तक जब तक मेरा माल नहीं झड़ गया। अपना गाढ़ा वीर्य उसके पेट पर गिरा कर मुझे बहुत सुकून मिला, बहुत मर्दानगी की फीलिंग आई।

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उसको उसी हाल में छोड़ कर मैं बाथरूम में गया. पहले तो मैंने मूता, फिर शीशे के सामने खड़े हो कर खुद को देखा।

मन में एक विकार आया- अरे वाह रे तूने तो साले कच्ची कली फाड़ दी, क्या बात है साले, तू तो बहुत बड़ा मर्द है रे, वो भी 50 की उम्र में!

मैं मन ही मन खुश होता वापिस कमरे में आया तो दिव्या उठ कर बाथरूम में गई और काफी देर तक अंदर रही।
फिर बाहर आई।
मैंने उसे एक गिलास बोर्नविटा वाला दूध गर्म करके पिलाया और तेल से हल्के हाथों से उसके सारे बदन की मालिश की।
तब कहीं वो सहज हुई।

शाम को करीब 5 बजे मैं उसको लेकर अपने घर गया और बीवी से कह दिया- इसकी तबीयत खराब है, थोड़ा खयाल रखना।
मुझे एक बार लगा कि मेरी बीवी उसकी हालात देख कर सब समझ गई.

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मेरी बीवी ने उसकी अच्छी सेवा की अपनी बेटी की तरह, मगर उसे ये नहीं पता था कि उसका पति और दिव्या का नकली बाप ही उसकी इस हालात का जिम्मेदार है।[email protected]

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मुंहबोली बेटी की सील तोड़ी Antarvasna Hindi me

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Muhboli beti ki seal todi –Antarvasna Hindi me

Antarvasna Hindi me: The story ahead of the daughter’s mother’s mother’s fuck. When my eyes opened, it was ten and a half. Rupa was not in bed. But the night I took off her bra and panty, I was still lying on the floor. Of course I had to lie down with the sheet, but inside the sheet, I was completely naked and in the morning my cock was also full in Antarvasna Hindi me.

Then Divya came in the room and kept calling me Good Morning Papa and having a cup of tea at my head the Antarvasna Hindi me.
Once, I was very ashamed, brother, I was naked in front of my daughter and my trunk cocks made the sheet a tent, which Divya had also seen.

Having tea, Divya picked up her mother’s bra panties lying on the floor and went away.
I started drinking tea, what would this girl be thinking that her mother was fucking her non-male all night. Rupa’s screams, siskaris, all must have heard this too. But I ignored it for Antarvasna Hindi me.

I got up after drinking tea and went to the bathroom. When I came down after getting ready to take a bath, Rupa was fully prepared after washing her bath the Antarvasna Hindi me.

As soon as I came, he touched my feet in front of his daughters, after that he had breakfast, we all had breakfast, but I saw both girls had a mischievous smile on their face like Antarvasna Hindi me.

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I had a holiday that day, so that afternoon I also once Chupa Choda, the same thing happened again at night the Antarvasna Hindi me.

Right now Ramya was somewhat calm, but Divya was very happy with this, she expressed her happiness to kiss me many times. Papa used to stay around me all the time for Antarvasna Hindi me.

The next day Divya was applying oil on my head, I was watching something on my mobile. When she had applied oil, I wanted to lie down, so Divya kept my head in her lap. I did not find anything strange in it the Antarvasna Hindi me.
I was busy in my mobile in a hurry that Divya suddenly kissed me.

Antarvasna Hindi me
I was shocked. I was very surprised – Divya, what did you do?
I asked him.
She said – You love your mother so much, so I thought how can I thank you!
She looked a little scared the Antarvasna Hindi me.

I said – but son, your mother is giving me all this, you do not have to do or give anything separately like Antarvasna Hindi me.
She said – why father, can I not give you anything from my side?
I said – but son, the kiss of lips is for him, the person you love very much, that person is your boyfriend or husband.

Divya was silent at first, then got up and started crying a little – whatever your wish is on Antarvasna Hindi me.

My gotte came in a cry that ‘Hey dude, what is happening, this girl of tomorrow is ready to give too.’
Now the problem in front of me was that from the very beginning I used to call Divya my daughter and understand, so all this with her? No no… how can this happen? I will explain it to him.

After that I tried to convince Divya 2-3 times but it had the opposite effect and Divya herself agreed that she loves me like Antarvasna Hindi me.
I said too – but you call me Papa?
She said o-o, I will not say later today.
I explained a lot but that girl insisted on stubbornness.

I also told him – you had promised me that I will never cheat on your mother and now you are provoking me to break that promise?
But the girl did not listen and said – mother go to hell. I love you, so I love you!

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It was a big struggle for me, but then I thought, ‘Why should anyone hurt me?’ Which one is my own daughter and which one is her real father. The real father is real and the fake father is fake. ‘
Just these thoughts came to mind and the very next moment I started feeling that perfect for my 19 year old daughter, sex. In a single moment, I began to see many shortcomings in Rupa’s body, and only the characteristics of Divya’s raw body the Antarvasna Hindi me.

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Then Divya came in the room and kept calling me Good Morning Papa and having a cup of tea at my head the Antarvasna Hindi me.
Once, I was very ashamed, brother, I was naked in front of my daughter and my trunk cocks made the sheet a tent, which Divya had also seen.

Having tea, Divya picked up her mother’s bra panties lying on the floor and went away.
I started drinking tea, what would this girl be thinking that her mother was fucking her non-male all night. Rupa’s screams, siskaris, all must have heard this too. But I ignored it.

I got up after drinking tea and went to the bathroom. When I came down after getting ready to take a bath, Rupa was fully prepared after washing her bath like on Antarvasna Hindi me.

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I said – but son, the kiss of lips is for him, the person you love very much, that person is your boyfriend or husband.

Divya was silent at first, then got up and started crying a little – whatever your wish is then Antarvasna Hindi me.

My gotte came in a cry that ‘Hey dude, what is happening, this girl of tomorrow is ready to give too.’
Now the problem in front of me was that from the very beginning I used to call Divya my daughter and understand, so all this with her? No no… how can this happen? I will explain it to him.

After that I tried to convince Divya 2-3 times but it had the opposite effect and Divya herself agreed that she loves me for Antarvasna Hindi me.
I said too – but you call me Papa?
She said o-o, I will not say later today.
I explained a lot but that girl insisted on stubbornness.

I also told him – you had promised me that I will never cheat on your mother and now you are provoking me to break that promise?
But the girl did not listen and said – mother go to hell. I love you, so I love you!

Antarvasna Hindi me
It was a big struggle for me, but then I thought, ‘Why should anyone hurt me?’ Which one is my own daughter and which one is her real father. The real father is real and the fake father is fake. ‘
Just these thoughts came to mind and the very next moment I started feeling that perfect for my 19 year old daughter, sex. In a single moment, I began to see many shortcomings in Rupa’s body, and only the characteristics of Divya’s raw body….Antarvasna Hindi me.

But this thing was sure that now I had laddus in both my hands, whenever I had the chance, I would catch it. Within two or four days, I touched every part of Divya’s body by touching it. Rather one said to him- Divya, I want to see you absolutely naked for Antarvasna Hindi me.
So she went to the bathroom and took off all her clothes inside and then opened the door slightly and looked outside the Antarvasna Hindi me.

I was alone in the room outside, Rupa and Ramya were in the kitchen below. When I gestured to her, Divya came out of the bathroom and came right in front of me.
Beautiful slim skinny girl with 19 year old divya physique. But his standing mummies, and tight butts made me crazy, I saw both his mamma and the rest of the body Antarvasna Hindi me.
My cock got tanned and I told her – Divya, now you will have to fuck.
She said – Papa, I am your daughter, when you feel like it!
She went back to the bathroom with her small butts matati.

After that she came again wearing clothes.

Antarvasna Hindi me
I asked him, Divya, tell me one thing, you are beautiful, in your class too many boys must be hitting you line, then what did you see in me and anyway I am having an affair with your mother for Antarvasna Hindi me.

She said- Papa, you liked me from the beginning, but only some relationship between us became different, you became my father and I became your daughter. And that night when you stayed at our house, what happened between you and my mother, both of us sisters heard everything. To tell the truth, I got so excited to hear my mother’s cries and screams that I calmed myself with my hand. I also often feel like if you do with my mother, how would you feel if you did with me, and I used to think that I would die on you Antarvasna Hindi me.

I myself was thinking how should I say this to you, but you said it is fine, I did not have to say, and you are my very dear father, so I will not hide anything from you Antarvasna Hindi me. You can ask me anything, you can say. Now when the daughter has become naked, what is the need of the fake father, to pretend to be sharafat.

I said- will Divya do sex with me?
She said – you do anything, I will not refuse you Antarvasna Hindi me.

I took my tongue out to check it and put it in the mouth in a straight divya and my daughter sucked my tongue. I pressed both her mums tightly. But more than this I could not do anything with him because Rupa was always at home. And how could I fuck her daughter while she was there.

The yearning was complete when I got a chance and when I would enjoy the tender body of this virgin girl. But now I would have been able to hug and kiss Rupa in front of Divya too.
And that too, seeing how smiling I am going to enjoy her mother’s youth Antarvasna Hindi me.
She also knew that whenever I get a chance, I also fuck her mother hard, she would get excited by hearing her mother’s screams Antarvasna Hindi me.

Antarvasna Hindi me Then again one day Divya gets a call- Papa, Mummy and Ramya are going to see Babaji, I have falsely pretended my paper and I am not going.
Meaning she will be alone at home, at home.
I jumped with joy.

The day Rupa and Ramya went, I myself came and offered them both, saying, don’t you worry, I will take Divya to my house Antarvasna Hindi me.

But I first offered them to Rupa’s house. Divya was sitting there, I filled her in my arms as soon as I went – oh my dear daughter!
Having said that, I took a lot of kisses from him.
She was also very happy- Hey dad, what is this, you got impatient.
I said, oh my love, who would not be impatient to see your raw virgin body for Antarvasna Hindi me.

I kissed her a lot, sucked her cheeks, sucked her lips like Antarvasna Hindi me.
Then I assumed myself that hey man where this part has gone, I have till evening, do it comfortably.

I told Divya – son, do one thing.
She said – Dad, sir?
I said – this evening both of us will go to my house, but before that we will do all that we were thinking in our mind for so many days. So I wish that if both of us spend our time in this house by staying completely naked in the evening, so that I can see you nakedly with my eyes.
She said – you are my father, how can I refuse to talk about you then Antarvasna Hindi me.

When she got up to unbutton her clothes, I stopped her and stripped her by stripping off the same T-shirt, her lower, under-shirt and tights, and then herself was completely naked.
Father daughter today both were standing naked in front of each other.

Antarvasna Hindi me
I got Divya attached to my heart. She too clung to me and my cock was rising up by making its place in the middle of both of us.

Then I kissed all of Divya’s body, kissed her mummies, kissed her belly, back, thighs all over the place. His whimper was also licked, his ass was also licked the Antarvasna Hindi me.

Of course I wanted to do everything comfortably, but where did the greedy person have patience… I licked her girl with my tongue very much, she licked so much that she started to release water and I licked it with great fun Antarvasna Hindi me.

Then I told him- son, will you suck my father’s cock?

She said – I have never done this work, and to be honest, I find it all dirty.
I said – okay, don’t suck, but if you do it will suck you?
She said – don’t know, father

I went straight to the Diwan and took him upside down the Antarvasna Hindi me. Now I opened both his legs, set his cock on my mouth and before putting tongue in his hair I said to him- Divya son, hold Papa’s cock in your hand and keep it near your mouth, if you do, then suck it.

Antarvasna Hindi me I knew that when I would lick it so much that it started to release a lot of water, then this girl would suck my cock on her own under the charge of work like Antarvasna Hindi me.

And the same thing happened… Hardly I would have licked his cock for only two to three minutes, the grip of his thighs tightened on my face and the grip of his hand on my cock. And then I had a soft feeling on Antarvasna Hindi me.
When the touch of her soft, pink lips hovered around the top of my cocks, my heart woke up, my daughter had taken my cock in her mouth. I did not have to say anything to her, she herself kept licking and sucking my cock in her style then Antarvasna Hindi me.


It was also very hot and I too… then what was the delay the Antarvasna Hindi me.
I stopped him, took him straight on the diwan and said- Look son, now I will put my Aloda in your virgin girl. This is your first time, maybe there is a little pain, so, my daughter, if there is pain, tell us, we will stop. But it is so sure that today I want to remove all my cocks in your cock, if you supported me, otherwise it is right in Antarvasna Hindi me.
She said – Dad, just do it comfortably, it even entered my mouth with great difficulty. There will be pain, but I will try to tolerate it.

I put a lot of spit on my cock, wet it well and then put it on Divya’s virgin pink puddle.
Once the heart came ‘Oh man, what is tearing a girl like daughter, but then I once looked up and said to God’ Of course I am doing wrong things in the eyes of the world, but in my view it is fine, So keep your grace and give this girl the power to bear it all then Antarvasna Hindi me.

Antarvasna Hindi me And then I thrust my waist, my Aloda broke into Divya’s virgin hair and entered inside.
As if his eyes have come out.
Holding my shoulders, she only said this once – Ummh… Ahhh… Hah… Oh… Papa… No!

But by then, the father of the father’s cock had entered the daughter’s cloak. She was in complete shock, but I was completely obsessed with work. Regardless of his pain, I pushed harder and penetrated my cock and his cock.

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But now no painful scream came out of Divya’s mouth, her eyes were torn, and face was torn and I used to force my cock in her body.
By the time Divya returned to her senses, I had pushed all my cocks into her Afuddi.

I had a strange pleasure in my mind, maybe to break the seal of a 19 year old girl at the age of 50, or to have sex with my own daughter, to fulfill my desire for sex, or to have my own sweetheart daughter Chodane , Don’t know what it was, but I was very happy.

I did not care about the pain of that girl, I could only see the happiness of my own heart.

After taking a little Divya said – Dad, what have you done?
I asked – what happened son?
She said – Papa looks like someone has ripped me in the middle, cut it with a sword. It looks like I will die.
I said nothing will happen son, this happens for the first time with every girl. But the next time you have sex, you will be very happy. This is just the first time, it will not happen again.

Antarvasna Hindi me
That girl was lying down on me imprudently. Looking at his face, he could feel nothing, except pain! And I was engaged to enjoy that erotic lustful prostitute, that girl like a prostitute.

I did not stop and kept fucking him till my goods fell. I got very relaxed by dropping my thick semen on his stomach, feeling of manhood.

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Leaving him in the same condition, I went to the bathroom. First I saw myself by standing in front of the statue, then the mirror.

There was a disorder in my mind- oh wow, you tore the raw bud, what is it, brother-in-law, you are too big man, even at the age of 50!

When I came back to my heart to be happy, Divya got up and went to the bathroom and stayed inside for a long time.
Then came out.
I fed him a glass of bournavita with warm milk and massaged his body with light hands with oil.
Then she became comfortable somewhere.

At around 5 o’clock in the evening, I took him to his house and told his wife – its health is bad, take care.
I once felt that my wife understood everything after seeing her situation.

Antarvasna Hindi me
My wife did her good service like her daughter, but she did not know that her husband and Divya’s fake father were responsible for her situation. [email protected]

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