Follow my blog with Bloglovinमुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई 1 Free chudi story

मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई 1 Free chudi story

मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई chudi story

chudi story: दोस्तो, यह कहानी मुझे मेरे एक पाठक ने भेजी है। मैंने उनसे पूछकर इस कहानी को थोड़ा और रोचक बनाया है, लीजिये पढ़िये।

मेरा नाम रत्न लाल है, और मेरी उम्र इस वक्त 50 साल की है। मैं मेरी पत्नी और मेरा बेटा बस यही मेरा परिवार है।
आपने मेरी पिछली कहानी के दो भागों
बीवी की सहेली पे दिल आ गया-1
बीवी की सहेली पे दिल आ गया-2
में पढ़ा कि अभी कुछ समय पहले मेरी पत्नी की एक सहेली रूपा मेरे साथ खुलने लगी, वो मुझे जीजाजी कह कर हंसी मज़ाक करने लगी तो मैंने मौक़ा ताड़ कर रूपा को चोद दिया और उसके बाद हमारे नाजायज रिश्ता आगे बढ़ा।

रूपा के घर में मेरी हैसियत उसके पति की ही है, आज भी है। रूपा की दोनों बेटियाँ मुझे ही पापा कहती हैं, उन सबकी हर एक ज़रूरत को मैं पूरी ज़िम्मेदारी से निभाता हूँ।

बढ़ते बढ़ते प्रेम इतना बढ़ा कि मैं खुद भूल गया कि मेरे सिर्फ एक बेटा है. मैंने उन दोनों लड़कियों को भी बाप का प्यार भरपूर दिया। उन्हें कभी किसी चीज़ की कमी नहीं होने दी। मेरी बीवी भी
कहती थी कि दोनों लड़कियाँ आपको अपने सगे बाप से भी ज़्यादा प्यार करती हैं।

और यह सही भी था क्योंकि रूपा का पति अपने घर में रोआब रखता था और अक्सर लड़कियों को डांट देना, कम बोलना उसकी आदत थी। मगर मैं लड़कियों से खूब हंस बोल लेता था। जब भी उनके घर जाता, दोनों लड़कियाँ बड़े प्यार से आकर मेरे से चिपक जाती।

मगर मुझे कभी ऐसी फीलिंग नहीं आई कि ये किसी गैर की लड़कियाँ हैं। कुछ मौके ऐसे भी आए, जब खेलते खेलते दोनों लड़कियों को मैंने गोद में उठाया, अपने कंधों पर बैठाया, एक ही बेड पर एक साथ लेट कर मोबाइल पर गेम भी खेली। खुशी तो जैसे चारों तरफ से बरस रही थी।
अब तो मेरी बीवी को भी विश्वास हो चला था कि मैं सिर्फ उन लड़कियों के प्रेम के कारण रूपा के घर जाता हूँ, तो कभी कभी मैं अकेला भी रूपा के घर जा आता था।

बस इतनी बात ज़रूर थी कि रूपा अक्सर कहा करती थी- हम सिर्फ दिन में ही क्यों मिलते हैं। कभी कोई प्रोग्राम बनाओ न, ताकि हम दोनों सारी रात प्रेम का खेल खेल सकें। मुझे रात को आपकी बहुत याद आती है। बहुत दिल करता है कि आप मेरे साथ लेटे हों, और हम दोनों बिल्कुल नंगे सारी रात एक दूसरे को प्यार करें।

मगर अब मेरे पास भी यही दिक्कत थी। बीवी जब घर में हो तो मैं रात बाहर कैसे गुज़ारूँ। और दूसरी दिक्कत रूपा की बेटियाँ। उसके घर में वो दिक्कत … मेरे घर में ये दिक्कत।
मगर किस्मत आपको कब किस मोड़, किस दोराहे या चौराहे पर ला कर खड़ा कर दे, आपको नहीं पता।

ऐसा ही मेरे साथ हुआ.

एक दिन मैं रूपा के घर गया। रूपा रसोई में थी तो मैं सीधा रसोई में गया, अपने साथ लाये गर्मागर्म समोसे मैंने रूपा को दिये और मौका देख कर उसको पीछे से ही अच्छी तरह से अपनी बांहों में भर लिया.
और जब उसने मुंह घुमाया, तो उसके होंठों को चूम लिया, उसने भी चुम्बन का जवाब चुम्बन से दिया।

मैंने पूछा- लड़कियाँ कहाँ हैं?
वो बोली- ऊपर कमरे में बैठी पढ़ रही हैं।
झट से मैंने उसकी नाईटी ऊपर उठानी शुरू की, वो बिदकी- अरे क्या करते हो, कोई आ जाएगा।

मैंने तो सिर्फ उसकी फुद्दी ही देखनी थी, वो देख ली।
उसे मैंने कहा- अच्छा ठीक चाय लेकर ऊपर आ जाओ।

मैं ऊपर लड़कियों के कमरे में चला गया। दोनों लड़कियाँ मुझे देख कर खुशी से चहक उठी और दौड़ कर आकर मुझसे लिपट गई- हैलो पापा, नमस्ते पापा।
मैंने दोनों को प्यार किया और दोनों फिर अपनी अपनी जगह जाकर बैठ गई।

उसके बाद मैंने उनसे उनकी पढ़ाई के बारे में पूछा और इधर उधर की बातें की। इतने में रूपा चाय और समोसे लेकर आ गई।
तभी दिव्या बोली- अरे समोसे … सच में पापा, मेरा न अभी समोसे खाने को ही दिल कर रहा था।
मैंने कहा- और देखो तुम्हारे दिल की बात मैंने सुन ली, और अपनी बेटी के लिए समोसे ले आया।

दिव्या ने एक समोसा उठाया और साथ में मुझे एक पप्पी भी दी।
हमने समोसे खाये, चाय पी।

चाय पीने के बाद हम वहीं बैठे बातें करने लगे। पहले बैठे थे, फिर धीरे धीरे खिसकते हुये लेट ही गए।

मैं उन्हें अपने मोबाइल पर कुछ फन्नी सी वीडियोज़ दिखा रहा था, जिन्हें देख देख कर हम सब हंस रहे थे। दोनों लड़कियाँ मेरे अगल बगल लेटी हुई थी और रूपा मेरे पाँव के पास बैठी थी. ये एक विशुद्ध पारिवारिक माहौल था। फिर रूपा बर्तन उठा कर रसोई में चली गई, और रम्या भी उसके साथ चली गई।

कमरे में सिर्फ मैं और दिव्या थे। अब जब हम दोनों कमरे में अकेले रह गए, तो मैं उठ कर बैठ गया, तब दिव्या बोली- पापा एक बात पूछूँ?
मैंने कहा- पूछ, मेरा बाबू, क्या बात है?
वो बोली- आप गुस्सा तो नहीं करोगे?
मैंने अपना मोबाइल बंद करके साइड पर रखा क्योंकि बात कोई गंभीर थी, तभी तो उसने मेरी नाराजगी के बारे में पहले ही पूछ लिया।

मैंने कहा- मैं अपने बाबू की की किसी बात पर गुस्सा नहीं होता, पूछो।
वो बोली- आप मम्मी से प्यार करते हो?

एक बार तो मैं उसकी बात सुन कर सन्न रह गया मगर अब जवाब तो देना था। अब सच बात तो यह थी कि मैं रूपा से कोई दिल से सच्चा प्यार नहीं करता था, सिर्फ मेरा उसके प्रति जिस्मानी आकर्षण था।
मगर फिर भी मैंने कहा- हाँ करता हूँ।
वो बोली- कितना प्यार करते हो?
मैंने कहा- पहले ये बताओ, तुम ये सब क्यों पूछ रही हो?
वो बोली- मैंने मम्मी की आँखों में आपके लिए बेहद प्यार देखा है। जैसे वो आपको देखती है।

मैंने कहा- देखो बेटा, अब तुम बड़ी हो गई हो, सब दुनियादारी समझती हो। तो मैं तुम्हारे सामने ये बात कबूल कर सकता हूँ कि हाँ मुझे तुम्हारी मम्मी से मोहब्बत है।
वो लड़की एकदम से मेरे से लिपट गई- बस पापा, आप मेरी मम्मी को कभी मत छोड़ना, वो आपसे बहुत प्यार करती है। मैंने मम्मी से पूछ लिया था, वो आपको बहुत चाहती हैं। वादा करो आप मम्मी को कभी धोका नहीं दोगे।

अब उसका दिल मैं कैसे तोड़ सकता था, मैंने भी वादा कर दिया कि मैं उसकी मम्मी को कभी धोखा नहीं दूँगा। पर सच्चाई ये थी कि इस रिश्ते की तो बुनियाद ही धोखे पर रखी गई थी। अगर मैंने अपनी ब्याहता पत्नी को धोखा दिया, तब तो रूपा के साथ मेरे सम्बन्ध बने।

मगर मेरे इस झूठे वादे ने मेरे लिए उस घर में नए दरवाजे खोल दिये। उसके बाद तो मैं पूरी तरह से ही उस घर का सदस्य बन गया। अब लड़कियों के ज़िद करने पर मैं हर रोज़ उनके घर जाता, चाहे थोड़ी देर के लिए ही सही। दोनों लड़कियाँ मुझे बहुत प्यार करती। अब उनके सामने ही मैं रूपा से हंसी मज़ाक कर लेता, उसे बांहों में भर लेता, कभी कभी चूम भी लेता।
दोनों लड़कियां हमारे इस प्रेमालाप की साक्षी थी और वो दोनों ये देख कर बहुत खुश होती कि उनकी माँ को भरपूर प्यार मिल रहा है।

फिर एक दिन मेरी पत्नी ने कहा कि वो कुछ दिनो के लिए अपने मायके जाना चाहती है।
मैंने क्या मना करना था, दोनों माँ बेटा, 3-4 दिन के लिए चले गए।

जिस दिन वो गए, उसी दिन मैंने रूपा को फोन पर कह दिया कि मेरी पत्नी मायके गई है 3 दिन के लिए, अगर कहो तो तुम्हारे घर रहने आ जाऊँ।
उसने कहाँ मना करना था।
उसी शाम अपने दफ्तर से मैं सीधा रूपा के घर गया।

पहले शाम की चाय पी, उसके बाद उसे और लड़कियों को लेकर बाज़ार गया, सब घुमाया, बाहर ही खाना खिलाया। खूब मज़े कर के हम घर वापिस आए।

तो अब वक्त आया सोने का। अभी रूपा थोड़ा झिझक रही थी कि अपनी लड़कियों के सामने वो किसी और मर्द के साथ सोने के लिए कैसे जाए।
मगर दिव्या ने खुद ही उसे कह दिया- मम्मी, आज आप पापा के साथ सो जाओ।
बेशक कुछ शर्माती, कुछ सकुचाती, मगर रूपा मेरा बेडरूम में आ गई।

मैंने दरवाजा बंद कर लिया और दरवाजा बंद करके रूपा को अपनी बांहों में भर लिया। बस बांहों में भरने की देरी थी कि रूपा भी पूरी शिद्दत से मुझसे लिपट गई। सबसे पहले हम दोनों ने अपने कपड़े उतारे, और सीधा बेड पर लेटते ही मेरा लंड उसकी फुद्दी में घुस चुका था।

मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई chudi story

उम्म्ह … अहह … हय … ओह …
आज तो जैसे हमारी सुहागरात थी। आज मेरी भी इच्छा थी कि साली रूपा की अच्छे से भोंसड़ी मारूँ।

अब मेरी आदत थी, बिना तैयारी के तो मैं रूपा के पास जाता नहीं था, तो आज भी पूरी तैयारी के साथ आया था। तीन चार मिनट की चुदाई में रूपा का पानी झड़ गया,

Muhboli beti ki maa ki chudi story

मगर जब उसका पानी झड़ा तो वो खूब तड़पी, खूब चिल्लाई, खूब शोर मचाया, बिना इस बात की परवाह किए कि साथ वाले कमरे में लेटी उसकी दो जवान बेटियाँ क्या सोचेंगी कि मम्मी की क्या ज़बरदस्त चुदाई हो रही है।

मगर बात सिर्फ यहीं तक नहीं रुकी। उस रात हम दोनों नहीं सोये, अगर सोये तो थोड़ी थोड़ी देर के लिए। जब भी जिसकी भी नींद खुलती, वो दूसरे को जगा लेता और फिर चुदाई शुरू हो जाती।

उस रात मैंने तीन बार रूपा को चोदा, और वो तो शायद 6-7 बार स्खलित हुई और हर बार उसने बिना किसी शर्म के खूब शोर मचा कर अपनी चुदाई का प्रदर्शन किया।

सुबह 5 बजे हम सोये।
[email protected]

आगे की कहानी: मुंहबोली बेटी ने खुद सील तुड़वायी

Join Telegram Group

मुंहबोली बेटी की मम्मी की चुदाई chudi story

Read in English

Muhboli beti ki maa ki chudi story

chudi story: Friends, this story was sent to me by one of my readers. I have made this story a bit more interesting by asking them, read it.

My name is Ratna Lal, and I am currently 50 years old. My wife and my son are just my family.
You made two parts of my previous story chudi story.
Heart has arrived on wife’s friend
Heart ain -2 on wife’s friend
I read that some time ago, my wife’s friend Roopa started opening up with me, she started laughing at me by calling me brother-in-law, then I gave chance to Chupa, and after that our illicit relationship continued.

My status in Rupa’s house is that of her husband, even today. Both of Rupa’s daughters call me Papa, I fulfill all their needs with full responsibility on chudi story.

Growing growing love grew so much that I myself forgot that I have only one son. I gave both of those girls a lot of love for the father. They never let anything fall short. My wife too
Used to say that both girls love you more than their real father.

And this was also true as Rupa’s husband kept Roab in his house and often used to scold the girls, speaking less. But I used to laugh a lot with girls. Whenever they went to their house, both girls used to come and love me then chudi story.

But I have never felt that they are girls of any other person. There were some occasions when, while playing, I picked up both girls on my lap, sat on my shoulders, lying on the same bed together and also played games on mobile. It was like raining from all around the chudi story.
Now my wife was also convinced that I go to Rupa’s house just because of the love of those girls, then sometimes I used to come alone to Rupa’s house like chudi story.

It was just such a thing that Roopa used to say often – why do we meet only during the day. Never make a program so that both of us can play the game of love all night the chudi story. I miss you so much at night It takes a lot of heart to lie with me, and we both love each other absolutely bare all night on chudi story.

But now I had the same problem. How do I spend the night outside when wife is at home? And the other problem was Rupa’s daughters. That problem in his house… this problem in my house on chudi story.
But you do not know when luck will bring you to any crossroads or crossroads.

This is what happened to me like chudi story.

One day I went to Rupa’s house. Rupa was in the kitchen, so I went straight to the kitchen, I brought the hot samosas with me, and seeing the opportunity, I filled it in my arms very well from behind then chudi story.
And when he turned his mouth, kissed her lips, he also answered the kiss with a kiss.

I asked- where are the girls?
She is studying sitting in the room above the chudi story.
Immediately I started raising his nightlife, that bidki – oh what do you do, someone will come.

I only wanted to see his pudding, he saw it the chudi story.
I told him – come right upstairs with fine tea.

I walked upstairs to the girls’ room. Both girls looked at me and woke up happily and came running and hugged me – Hello Papa, Namaste Papa then chudi story.
I loved both and both of them then went to their respective places.

After that I asked him about his studies and talked here and there. So Rupa brought tea and samosas and start chudi story.
Then Divya said – Hey Samosas… Papa really, my heart was not yet ready to eat samosas.
I said – and look, I listened to your heart, and brought samosas for my daughter.

Divya picked up a samosa and also gave me a puppy like chudi story.
We ate samosas, drank tea.

After drinking tea, we sat talking there. He was sitting first, then slowly moved back down the chudi story.

I was showing them some funny videos on my mobile, which we all were laughing after seeing. Both girls were lying next to me and Rupa was sitting near my feet. It was a pure family atmosphere. Rupa then took the utensil and went to the kitchen, and Ramya also went with him.

Only me and Divya were in the room. Now when both of us were left alone in the room, I got up and sat down, then Divya said- Should father ask one thing?
I said- Ask, my babu, what is the matter?
She said – will you not get angry and chudi story.
I switched off my mobile and kept it on the side because it was serious, then he asked about my displeasure in advance the chudi story.

I said – I do not get angry at anything about my babu, ask.
She said- do you love your mother?

Once I was stunned to hear that, but now I had to answer. Now the truth was that I did not truly love Rupa at all, only I had a physical attraction towards him like chudi story.
But still I said yes I do.
She said – how much do you love?
I said- first tell this, why are you asking all this?
She said – I have seen a lot of love for you in Mummy’s eyes. As she watches you.

I said- Look son, now you have grown up, everyone understands worldliness. So I can confess in front of you that yes I love your mother in chudi story.
That girl immediately hugged me – just dad, you never leave my mother, she loves you very much. I had asked my mother, she loves you very much. Promise you will never betray your mother like chudi story.

Now how could I break his heart, I also promised that I would never cheat his mother. But the truth was that the foundation of this relationship was laid on deception the chudi story. If I betrayed my married wife, then I have a relationship with Rupa above chudi story.

But this false promise opened new doors for me in that house. After that I became fully a member of that house. Now, if the girls insist, I go to their house every day, even if only for a while. Both girls love me very much. Now in front of him, I would laugh with Rupa, fill him in the arms, sometimes even kiss him the chudi story.
Both girls were witness to our courtship and both of them would be very happy to see that their mother is getting a lot of love.

Then one day my wife said that she wants to go to her maternal home for a few days.
What I had to refuse, both mother and son, left for 3-4 days like chudi story.

The same day he went, I told Roopa on the phone that my wife has gone to her maternal home for 3 days, if I say come to stay at your house in chudi story.
Where did he want to refuse.
That evening I went straight from my office to Rupa’s house for chudi story.

Drank tea first evening, then went to the market with her and the girls, roamed all over, fed outside. After a lot of fun, we came back home at chudi story.

So now the time has come to sleep. Now Rupa was hesitating a little how to go to sleep with another man in front of her girls the chudi story.
But Divya herself told him – Mother, today you sleep with your father.
Of course some shyness, some shyness, but Roopa came to my bedroom.

I closed the door and closed the door and filled Rupa in my arms. There was a delay in filling the arms so that Rupa also hugged me with full vigor. First of all, both of us took off our clothes, and as soon as I lay on the bed, my cock had penetrated it.

use
Ummh… Ahhh… Hah… Oh…
Today it was like our honeymoon. Today I also wished that I would hit my good wife Bhosari.

Now it was my habit, I did not go to Rupa without preparation, so even today I came with complete preparation. In three to four minutes of fuck, Rupa’s water fell, but when her water fell, she was tortured, screamed, made a lot of noise, regardless of what her two young daughters lying in the next room would think of their mother. Is there a great fuck.

But the matter did not stop here only. That night both of us did not sleep, if we slept for a while. Whenever whoever slept, he would wake up the other and then the fuck would begin.

That night I had Chupa three times, and she probably ejaculated 6-7 times and every time she made a big noise without any shame and performed her fuck.

We slept at 5 in the morning.
[email protected]

Read more chudai story –

xxx kahani फुफेरी बहन की सील तोड़ चुदाई 1 Real Best Sex

Desi xxx kahani जवान भतीजी की सील तोड़ी 1 Best Sex Story

Jija sali khani साली की सील तोड़ने का परम सुख 1 Best Sexकहानी

Leave a Comment