Jija sali khani साली की सील तोड़ने का परम सुख 1 Best Sexकहानी

साली की सील तोड़ने का परम सुख Jija sali khani

Jija sali khani: एक मेल ऐसा भी आया जिसमें मुझे बताया गया कि आप अपनी कहानियों में अश्लील भाषा का प्रयोग नहीं करते, जैसे – रंडी, बहन की लौड़ी, वेश्या वगैरह वगैरह।

मैं बताना चाहूंगा कि मेरे अब तक के अनुभव के आधार पर आज तक मैंने कई कॉलगर्ल, रिश्तेदारी में, पत्नी, गर्लफ्रेण्ड आदि के साथ चुदाई कार्यक्रम किये, मगर चुदाई कार्यक्रम के दौरान ना तो उनके मुंह से कोई अश्लील भाषा निकली और ना ही मेरे मुंह से ! तो कैसे मान लूं कि चोदते वक्त अगर अश्लील भाषा का प्रयोग किया जाये तो औरत और मर्द दोनो में उत्तेजना बढ़ती है। अश्लील भाषा का प्रयोग चोदते समय तो कतई नहीं करना चाहिये, उत्तेजना बढ़ने के बजाय हो सकता है कि शिथिलता आ जाये।

खैर ……. दोस्तो, आज नई कहानी लेकर आया हूँ !

मेरी पत्नी घर के काम काज के मामले में बहुत ही आलसी है, कभी कभी मुझे उस पर बहुत ही गुस्सा आता है, मगर फिर भी मैं जानबूझ कर उसे कुछ नहीं कहता।

मेरे ससुराल में शादी थी तो मुझे भी वहां जाना था। वहां पर बहुत से रिश्तेदार आये थे, वहां मेरी पत्नी ने अपनी एक रिश्तेदार से मिलाते हुए कहा- इसका नाम चांदनी हैं और हम इसको परीक्षा के बाद अपने पास ही रखेंगे।

जब मैंने उस लड़की को देखा तो सच में देखता रह गया। उसके बोबे क्या माशा अल्लाह, और काया गजब अति सुन्दर काया थी उसकी, कि जो भी उसको देखे, देखता ही रह जाये।

अचानक मेरी पत्नी की आवाज ने मुझे झकझोर दिया कि कहां खो गये।

मैंने कहा- कहीं नहीं।

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मेरी पत्नी ने मुझे धीरे से कहा- अगर तुम नहीं चाहते उसको अपने यहां पढ़ाना ! तो मैं मना कर देती हूँ।

मेरे मन में तो लड्‌डू फ़ूट रहे थे, मैं कब मना करने वाला था, मैंने कहा -नहीं-नहीं मुझे कोई एतराज नहीं।

जब तक मैं ससुराल में रहा तब तक मैं मजाक ही मजाक में उसके स्तन दबा देता, या नाजुक अंगों से छेड़छाड़ कर देता तो वह हंसकर भाग जाती।

जब मैं वापस अपने शहर आया तो मुझे उसकी याद आने लगी, मगर मैं अपने मुंह से कुछ नहीं कहना चाहता था क्योंकि पत्नी को शक होने का डर था। पर ऊपर वाला शायद एक बार फिर मुझ पर मेहरबान था।

मेरी पत्नी ने ही आगे होकर उसके शहर जाकर उसे लाने के लिये कहा। मेरा मन तो गार्डन-गार्डन हो गया।

मैं व मेरी पत्नी उसके शहर गये और उसे ले आये। अब तो बस मौके की तलाश थी। वाह री किस्मत मेरी पत्नी को फिर अपने ससुराल २-४ दिन के लिये जाना था। पहले तो मेरी पत्नी ने कहा- मैं चांदनी को भी साथ ले जाती हूँ। फिर उसने खुद ही विचार बदल दिया कि वह बेकार परेशान होगी, २-४ दिन की ही तो बात है। मैं और चांदनी मेरी पत्नी को छोड़ने सुबह ६ बजे ही रेलवे स्टेशन गये और उसे छोड़ कर वापस आये।

चांदनी ने आते ही कहा- जीजू चाय पीकर जाना !

मैंने उसका हाथ पकड़ कर बिस्तर पर खींच लिया और मस्ती करने लगा। यह सब ऊपर की मस्ती मजाक तो मेरी पत्नी के सामने भी करता था, मगर आज तो बस उसे चोदने का मन बना हुआ था।

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मैंने कहा- चांदनी, चाय-वाय बाद में बनाना, आओ थोड़ी देर बैठो तो।

उसने कहा- जीजू, क्या बात है, विचार तो नेक हैं, आपके?

मैंने कहा- विचार तो आपके जीजू के हरदम ही नेक होते हैं, बस आप ही नहीं समझती।

और मैं अपने हाथों को उसके शरीर के नाजुक अंगों पर फिराने की कोशिश करने लगा। मैंने उसके वक्ष को पीछे से हल्के से दबाया तो वह कुनमुना गई और छुटने की नाकामयाब कोशिश करने लगी। आज मुझे लग रहा था कि चांदनी भी मुझसे चुदवाने को बेताब है।

मैंने जब उसकी तरफ से मौन इशारा समझा तो अपने हाथों को धीरे-धीरे उसके नाभि-मण्डल पर ले गया और मेरे होंठों ने भी अपना काम चालू कर दिया था। मेरी तरफ उसकी पीठ होने के कारण मैंने उसकी गरदन को अपनी तरफ घुमाकर उसके होंठों का रसस्वादन करने लगा। अब मेरा हौंसला भी बुलन्द होने लगा।

मैंने उसके कुर्ते को थोड़ा ऊपर किया तो उसने कहा- नहीं जीजू यह सब नहीं ! अगर किसी को मालूम हो गया तो?

मैंने चांदनी को समझाते हुए कहा- देखो जान ! इस घर में मेरे व तुम्हारे अलावा कोई नहीं है, तो किस को मालूम होगा और कौन बतायेगा कि हमने क्या किया।

चांदनी मेरा मतलब समझ गई और चुप हो गई। अब मैं भी बिन्दास हो गया और चांदनी की कुर्ती के अन्दर हाथ डालकर बोबों को दबाने व सहलाने लगा। चांदनी का पहला चुदाई कार्यक्रम था तो उसमें डर और मजा दोनों का समावेश था।

उसके मुख से रह रहकर सिसकारियाँ निकल रही थी- आ….ह…….. जीजू……………

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मैंने चांदनी की कुर्ती को एक झटके में शरीर से अलग कर उसकी ब्रा को खोल दिया और बोबों को मुँह में लेकर चूसने लगा।

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चांदनी मदहोशी में आंखे बंद किये ही कहने लगी- जीजू ! ऐसे क्या करते हो !

तो मैंने कहा- चांदनी अभी तो बाकी है ऐसे-वैसे सब करेंगे, तुम बस महसूस करो और मजा लो। jija sali khani

बोबों को चूसते हुए उसके नाभि-स्थल तक होंठों को फिराता हुआ लाया, नाभि से नीचे जाना चाह रहा था, मगर चांदनी का नाइट पायजामा और पेंटी दीवार बन कर खड़े थे। इधर चांदनी मेरी पीठ को सहला रही थी। मैंने चांदनी की पैंटी और पायजामा एक बार में ही खोल दिया और अपना मुँह चांदनी की गुलाबी चूत पर ले गया, चांदनी की गुलाबी चूत पर नाम मात्र के मुलायम बाल थे जो उसकी गुलाबी चूत की पहरेदारी कर रहे थे।

मैंने अंगूठे से उसके पहरेदारों को एक तरफ किया और उसकी गुलाबी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा। उसकी सिसकारियाँ लगातार जारी थी- जी……जू……….ये क्या……….कर रहे……. हो……….आ.हहहहहह जी…..जू………मजजजजजा आाा ररररहा हैं औररररर जोर सेससस चाटटो नााा

jija sali khani - hindisexstory - antarvasna 2

गुलाबी चूत से रिस रिस कर नमकीन पानी निकल रहा था, उसे चाटने में मुझे भी मजा आ रहा था और शायद अब चांदनी को भी मजा आने लगा था। चांदनी अपनी गांड उठा उठा कर मुखचोदन करा रही थी। jija sali khani

आधे घण्टे तक चूत चाटने के बाद हमारे लण्ड देव भी हुंकारने लगे और अपनी उपस्थिति दर्ज कराने को व्याकुल होने लगे। मैंने अपने कपड़े उतारे और अपना लण्ड निकाल कर चांदनी के हाथ में दे दिया।

वह लण्ड देखते ही चिल्ला उठी- ये क्याऽऽऽ ?

मैंने कहा- लण्ड।

बोली- इतना बड़ाऽऽ? मैं मर जाऊंगी जीजू ! नहीं मुझे छोड़ दो !

मैंने उसे समझाया- जानू, तुम्हारी जीजी भी तो इसे लेती हैं, वो तो नहीं मरी। इसे मुँह में लो ! तुम्हें मजा आयेगा !

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वह ना ना करती हुई मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेने लगी। धीरे धीरे आधा लण्ड मुँह में लेने के बाद मैंने उसके मुंह को चोदना चालू कर दिया। लण्ड चूसने में अब चांदनी को भी मजा आ रहा था। वो अब लण्ड को लॉलीपाप की तरह चूसने लगी।

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मैं पॉजीशन बदलते हुए ६९ की पॉजीशन में आ गया और अब वो मेरा लण्ड और मैं उसकी चूत चाटने लगा। करीब २०-२५ मिनट में चांदनी दो बार स्खलित हो गई और मैं अब होने वाला था।

और मैं……….. ये ……..गया वो गया……… और अपना सारा माल उसके मुँह में उड़ेल दिया। और फिर आपस में चिपक कर हांफने लगे। jija sali khani

थोड़ी देर बाद अचानक अपने लंड पर किसी के स्पर्श से मैंने आंखे खोली तो देखा कि चांदनी उससे खेल रही है और उसे खड़ा करने की कोशिश कर रही है। मेरे आंख खोलते ही मुझे अर्थपूर्ण दृष्टि से देखा। मैं समझ गया कि अब मेरी साली को जीजू से क्या चाहिये।

मेरा लण्ड कब पीछे रहने वाला था, उसने तुरन्त सलामी ठोक दी और चूत पर जाकर पहरेदारों से भिड़ गया। आखिर जीत मेरे लण्ड की हुई और सारी दीवारें तोड़ता हुआ चांदनी की अनछुई गीली, चिकनी चूत में धीरे-धीरे प्रवेश करने लगा क्योंकि मुझे मालूम था कि चांदनी पहली बार चुदने वाली हैं।

जैसे ही लण्ड ने संकरे रास्ते में प्रवेश किया, चांदनी ने रोक दिया- नहीं जीजू ! दर्द हो रहा है ! और चिल्लाने लगी।

मैंने सोचा अगर चांदनी की बातों में आ गया तो सारा किया धरा रह जायेगा और मैंने तुरन्त चांदनी के होंठों पर कब्जा कर एक लण्ड की तेज ठोकर लगाई और उसकी चिल्लाहट को होंठों से दबा दिया।

मैंने महसूस किया कि लण्ड पर खून का फव्वारा छुट गया और वह हाथ पैर मारने लगी,

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मगर मैं अपने हाथों से उसके स्तनों को सहलाते हुए और होंठों से अब गाल, कान, गरदन वगैरह चूम कर उसे दिलासा देने लगा और धीरे धीरे लण्ड को अंदर बाहर करने लगा। उसका प्रतिरोध अब कम होता नजर आया और अब शायद उसे भी मजा आने लगा इसलिये गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी और मुंह से अनाप शनाप आवाजें निकालने लगी- जी……जू चो…….दो मुझे………….. चोद………..डालो ! वगैरह वगैरह।

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लण्ड और चूत की लड़ाई चालू हो गई थी, या यूं कहिये आपस में शास्त्रीय संगीत की प्रतिस्पर्धा चालू हो गई हो। क्योंकि लण्ड जैसे ही अन्दर जाता तो तबले पर पड़ने वाली थाप की आवाज आती और चांदनी के मुँह सिसकारियाँ निकलती। मतलब कि उस वक्त सरगम बज रही थी।

१५-२० मिनट बाद मैंने चूत में लण्ड डाले डाले ही उसे घोड़ी बनाया और फिर चालू हो गया। इस दरम्यान वो २-३ बार झड़ चुकी थी मगर मेरा अभी ठिकाना नजर नहीं आ रहा था।

मगर घोड़ी की पोजीशन में आते ही मुझे लगने लगा कि अब ज्यादा देर नहीं टिक सकूंगा और मैं भी १५-२० धक्कों के बाद उस पर ढेर हो गया और अपना सारा माल उसकी कोमल चूत में बहा दिया।

देर बाद जब हम उठे तो उसकी नजर बिस्तर पर गई जहां खून ही खून और वीर्य उसका और मेरा दोनों का पड़ा था, जिसे देख कर वह डर गई और रोने लगी- जीजू ! यह क्या हुआ ? इतना खून निकल गया।

मैंने कहा- साली साहिबा ! यह सब तो पहली बार में होता ही है ! और समझाने लगा।

मैंने उस दिन ऑफिस फोन कर छुट्‌टी ले ली और उस दिन और उसके बाद जब तक मेरी पत्नी नहीं आई तब तक मैं चांदनी को लगातार चोदता रहा कभी घोड़ी-कुतिया तो कभी किचन में एक टांग पर। कुल मिलाकर चांदनी के साथ बिताये वो हर पल आज भी मेरी आंखों के सामने आते हैं तो बस उसे चोदने की इच्छा जागृत हो जाती है।

उसके बाद हमें जब भी दिन में, रात में या जब भी मौका मिलता हम एक हो जाते। अब वो हमारे साथ नहीं रहती ! वो अपने घर चली गई, मगर उसकी याद अब भी दिल में बाकी है।

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यह कहानी आपको कैसी लगी, मेल करें।

चोदे, चुदायें और लाइफ बनायें।

आपको मेरी यह सच्ची सेक्स घटना कैसी लगी मुझे facebook पर ज़रूर बताये में आपके comment और message का इंतज़ार करूगा.

Jija sali khani

Read in English

Sali ki seal thodne ka parm shukh – Jija sali khani

Jija sali khani: There was a mail in which I was told that you do not use vulgar language in your stories, such as pickup, sister’s laundress, prostitute, etc.

I would like to say that on the basis of my experience so far, till date I have done many callgirl, kinship, wife, girlfriends etc. with me, but neither did any vulgar language come out of my mouth nor did my mouth From! So how can I believe that if vulgar language is used while fucking, then there is excitement in both men and women. Indecent language should not be used while fucking, instead of increasing the excitement, it may be that the relaxation comes on Jija sali khani.

Well ……. Friends, I have brought a new story today!

My wife is very lazy in the matter of household work, sometimes I get very angry on her, but still I do not deliberately tell her anything about Jija sali khani.

When my mother-in-law was married, I also had to go there. Many relatives had come there, my wife said while shaking with one of her relatives – its name is Chandni and we will keep it with us after the examination then Jija sali khani.

When I saw that girl, I really kept looking. What was his son, Masha Allah, and what a very beautiful body he was, that anyone who sees him, should keep watching.

Suddenly my wife’s voice shook me where I was lost the Jija sali khani.

I said – Nowhere.

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My wife said softly to me – if you do not want to teach it here! So I refuse.

I was fighting in my mind, when was I going to refuse, I said – No – I have no objection.

As long as I stayed in the in-laws, I would have mocked her breasts jokingly, or pierced with delicate organs, she would laugh and run away and Jija sali khani.

When I came back to my city, I started to remember him, but I did not want to say anything with my mouth because the wife was afraid of being suspicious. But the one above was probably once again kind to me for Jija sali khani.

My wife went ahead and asked her to go to her city. My mind became garden-garden.

Me and my wife went to his city and brought him. Now it was just looking for opportunity. Wow, my wife had to go back to her in-laws’ house for 2-3 days. At first, my wife said- I take the moonlight also. Then she herself changed her mind that she would be unnecessarily upset, it is only a matter of 2-3 days. Me and Chandni left my wife and went to the railway station only at 4 in the morning and left her and came back then Jija sali khani.

Chandni said as soon as she came – go drink jiju tea!

I grabbed his hand and pulled him to bed and started having fun. All this fun was fun in front of my wife as well, but today she was just thinking of fucking her.

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I said – Moonlight, make tea-y later, come sit for a while.

He said – Brother, what is the matter, thoughts are noble, your?

I said – Thoughts are always good for your brother-in-law, only you do not understand Jija sali khani.

And I started trying to move my hands on the delicate parts of his body. When I pressed her chest lightly from the back, she went to Kunmuna and started trying unsuccessfully to escape. Today I felt that Moonlight is also desperate to fuck me like Jija sali khani.

When I saw a silent gesture from her side, I moved my hands slowly to her navel and my lips had also started their work. Due to his back towards me, I turned his neck towards him and started to taste his lips. Now my courage also started getting stronger on Jija sali khani.

When I put her kurta up a little, she said – No, Jiju, this is not all! If anyone knows?

While explaining the moonlight, I said- Look darling! There is no one but me and you in this house, so who will know and who will tell what we did no Jija sali khani.

Moonlight understood my meaning and became silent. Now I too became mindless and put my hands inside the moonlight kurti and started pressing and caressing the bobs. Chandni was the first chudai program, so it included both fear and fun about Jija sali khani.

Staying from his mouth, Siskaria was coming out- Aa …… .. Jiju ……………

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I separated Chandni’s kurti from the body in one stroke and opened her bra and started sucking the bobs in the mouth.

Moonlight closed his eyes and said – Jiju! What do you do like this?

So I said – the moonlight is still left, everyone will do it, you just feel and have fun. jija sali khani
Sucking the bobs brought her lips to her navel, flipping her lips, wanting to go down from the navel, but the moonlight night pajamas and panties stood as walls. Here the moonlight was rubbing my back.

I opened the moonlight panties and pajamas at once and moved my face to the pink pussy of the moonlight, there was only a soft hair on the moonlight pink pussy that was guarding her pink pussy on Jija sali khani.
I put her guards aside with the thumb and started licking her pink pussy with my tongue. His Sissariya was continued – G …… .Ju ……… .What …… ..the ……. Ho ……… .a.hhhhhhhhhhhhhh… ..ju ……… Mjjajjaja is coming and going loudly Sissi Chatto Naa

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Salty water was coming out from the pink pussy, I was also enjoying licking it and maybe now Moonlight was also enjoying it. Moonlight was raising her ass and making her ascendant. jija sali khani
After licking the pussy for half an hour, our Lund Dev also started screaming and was anxious to make his presence felt. I took off my clothes and took out my LND and gave it to Moonlight.

She screamed as soon as she saw LND – what is this?

I said – LND.

Bid – so big? I will die brother-in-law No leave me

I explained to her- Janu, even your brother-in-law takes it, she has not died. Take it in the mouth! You will enjoy it

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She started not taking my LND in her mouth. After slowly taking half LND in the mouth, I started fucking her mouth. Chandni was also enjoying sucking LND. She now started sucking LND like a lollipop. Changing the position, I came to the position of 49 and now my LND and I started licking her pussy. In about 20-25 minutes, the moonlight ejected twice and I was about to happen now.

And I ……… ..this …… .. Gaya he went ……… and poured all his goods into his mouth. And then they started panting with each other. jija sali khani
After a while I suddenly opened my eyes with the touch of someone on my cock and saw that Moonlight was playing with her and trying to make her stand up. As soon as I opened my eyes, I looked at me meaningfully. I understood what my sister in law wants from her brother-in-law.

When my LND was about to stay behind, he immediately opened the salute and went to the clash and confronted the guards. After all, I won LND and breaking all the walls, the moonlight slowly entered the untouched wet, smooth pussy because I knew that the moonlight would be the first time.

As soon as LND entered the narrow path, the moonlight stopped – no brother! Its paining ! And started shouting.

I thought that if I came to the moonlight, then all the work would be stopped and I immediately captured the lips of the moonlight and licked a LND fast and suppressed its cry from the lips.

I felt that the fountain of blood had escaped on LND and she started to stroke her hands and feet, but I started to comfort her by rubbing her breasts with my hands and now kissing her cheeks, ears, neck etc. Started out. His resistance now seemed to be decreasing and now he started to enjoy it too, so he lifted his ass and started supporting me and started making loud noises from the mouth – Ji… Ju Cho ……. Let me ………… ..Chod ……… ..drop! Etcetera et cetera.

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The battle between Lund and Chitti had started, or so, the competition of classical music had started. Because as soon as LND entered, the sound of the beat falling on the tabla would come and the moonlight would come out. Meaning that the gamut was playing at that time.

After 15-20 minutes I put LND in my pussy and made it a mare and then it started. During this time she had fallen 2-3 times but I could not see her whereabouts.

But as soon as the mare came into the position, I started feeling that I would not be able to last much longer and after 15-20 bumps, I piled on it and dumped all my goods in her soft pussy.

After a while, when we woke up, her eyes went to bed where blood and blood semen were lying between her and mine, seeing that she got scared and started crying – Jiju! what happened ? So much blood spilled.

I said, sister-in-law! All this happens at first! And started explaining.

I took leave by calling the office that day and till that day and after that till my wife came, I kept fucking Chandni continuously. Sometimes a mare and a bitch, sometimes on a leg in the kitchen. Overall, every moment I spend with the moonlight still comes in front of my eyes, then the desire to fuck it is awakened.

After that we would unite whenever we got a chance in the day, at night or whenever. She is no longer with us! She went to her house, but her memory still remains in her heart.

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