Freehindisexstories क्लासरूम में 1 लड़की की सील तोड़ी Best Sex

क्लासरूम में 1 लड़की की सील तोड़ी Freehindisexstories

Freehindisexstories: मेरी क्लास की एक लड़की पर सब लड़के बुरी नजर डालते थे क्योंकि वो बेपनाह हुस्न की मलिका थी. मुझे बहुत बुरा लगता था लड़कों की बातें सुन कर. तो मैंने क्या किया?

मेरा नाम रोहण है. जब मैं 19 साल का था, तब मुझे जैनब (काल्पनिक नाम) नाम की एक लड़की पसंद आ गयी. जैनब मेरे कोचिंग में पढ़ती थी. जैनब का रंग गोरा था और वो करीबन साढ़े पांच फिट लंबी थी. उसकी चुचियों की साइज 32 इंच थी और नजरें कंटीली थीं.

जैनब को देख कर कोचिंग और मोहल्ले के लड़के मुठ मार कर खुद को शांत कर लेते थे.

हमारी ये कोचिंग स्कूल में ही थी. स्कूल के बाद शाम में 03:00 बजे से कोचिंग से घर के लिए चल देता था. मैं पढ़ाई में अच्छा हूँ … लड़कियों से हमेशा से दूरी रखने वाला लड़का हूँ.

मुझे उसको देख कर न जाने ऐसा क्यों लगने लगता था कि इस लड़की को मुझे इन भूखे भेड़ियों की वासना से बचा लेना चाहिए. यही सोच कर मैं कोचिंग से जब भी घर जाने के लिए निकलता तो जैनब के पीछे पीछे कुछ दूरी बनाता हुआ उसे उसके घर तक पहुंचा कर ही अपने घर जाता था.

मेरी इस बात को मेरा एक दोस्त समझता था. पहले पहल तो उसने मेरी इस बात पर ध्यान नहीं दिया. मगर जब दोस्तों के बीच जैनब की जवानी की चर्चा होने लगती, तो मैं उखड़ जाता था.

ये सब देख कर मेरा वो दोस्त समझ गया था कि जैनब मुझे बेहद पसंद है.
उसने मुझसे कहा कि यदि तुमको जैनब पसंद है, तो उससे अपनी बात कहते क्यों नहीं?

मगर मैं ऐसा नहीं कह सकता था, शायद मेरा शर्मीलापन मुझे ऐसा करने देने के आड़े आ रहा था.

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फिर एक दिन की बात है कि मेरे इसी दोस्त ने मुझे चैलेंज किया कि तुम यदि उस लड़की को किसी लड़के की जबरदस्ती से बचाना चाहते हो, तो उस लड़की को पटा लो. वरना कोई न कोई उस कली को मसल देगा.
मैंने कहा- ठीक है … एक महीने में मैं उससे ही खुद को प्रपोज करवा लूंगा.

अब ये सामने चैलेंज था, तो मैंने एक तरकीब सोची. मैं हमेशा की तरह कोचिंग आता और जाता, लेकिन पढ़ाई के साथ अब साथ जैनब को देखता रहता. इसी दौरान जब उसकी नजर मुझसे मिल जाती थी, तो मैं नजरें घुमा कर बोर्ड पर कर लेता. इस तरह से देखने से एक दो बार जैनब भी मुस्कुराई … मगर मैंने उसकी तरफ से अपना मुँह मोड़ लिया.

अब भी कोचिंग के बाद जब अपने घर जाने लगता, तो उसे घर तक पहुंचा कर ही जाता. ये बात उसने नोट कर ली थी.

इस बीच मैं उससे कुछ नहीं कहता था. जैनब भी ये समझ गयी थी कि मैं उससे कुछ भी कहने से रहा.

एक दिन टेस्ट एग्जाम चल रहे थे. मैंने सारे प्रश्न हल कर दिए थे. इस बीच जिसने भी मुझे हेल्प मांगी … मैंने सबको मदद की.

अचानक से मेरे पेन की स्याही खत्म हो गई. मैं परेशान हो गया. मुझे परेशान देख कर मेरे एक दोस्त ने मुझसे पूछा- क्या हुआ?

मैंने पेन को हथेली पर चला कर उसे बताया कि पेन की इंक खत्म हो गई.

मेरे दोस्त ने ये देखा तो उसने जोर से लगभग चिल्लाते हुए क्लास से कहा- भाई कोई एक्स्ट्रा पेन लाया है, तो दे दो … रोहण का पेन काम नहीं कर रहा है.

जैनब ने मुस्कुराते हुए मुझे देखा और सबसे पहले अपने बॉक्स में से एक पेन निकाल कर मेरी तरफ बढ़ा दिया.

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फिर उसने मुझसे अपने आंसर भी मिलवा लिए कि उसने सही लिखे या नहीं.

ये देख कर मेरे दोस्त उसे या मुझे देख कर फब्ती कसने लगे थे. हम दोनों ये सब चुपचाप होकर सुनते और मुस्कुरा कर सबकी फब्तियों को टाल देते.

फिर 5 सितंबर आने वाला हो गया. सभी शिक्षक दिवस मनाने के लिए चंदा जमा करने लगे. लड़कियों ने गिफ्ट और लड़कों ने डेकोरेशन की जिम्मेदारी ली. केक का जिम्मा मैंने ले लिया और डिसाइड किया कि मैं पांच सितंबर को एक बजे ही कोचिंग क्लास में केक लेकर आ जाऊंगा और 2:30 बजे से सजावट के सामान लाने चलूंगा.

जैनब को मेरा प्लान पता चल गया. जैनब पांच सितंबर को एक बजे से कुछ पहले ही कोचिंग पहुंच गयी. मैं भी पांच मिनट बाद पहुंच गया.

मैं जैनब को देख कर सरप्राइज हो गया. मैंने पूछा- इतनी जल्दी आ गयी?

उसने उसी समय मुझे प्रपोज कर दिया. मैं हक्का-बक्का था … निशब्द हो गया था. वो मुझे चुप देख कर रोने लगी. मैं कुछ बोल पाता, उसने आगे बढ़ कर मुझे लिपकिस कर दिया.

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जैसे ही वो मुझसे लिपटी, मुझे उसके कपड़ों का अहसास हो गया. उसने शर्ट के अन्दर कुछ भी नहीं पहना था. मुझे तो जैनब से चिपकने की तमन्ना न जाने कबसे थी. उसकी भरी हुई छातियों ने मुझे एकदम से गर्म कर दिया और मैंने भी बदले में उससे पूरा लिपट कर उसे किस करने लगा.

मैंने उसे अपनी बांहों में कस लिया. उसकी आंखों से प्यार को पा लेने के आंसू झड़ रहे थे और मैं भी उसे अपने सीने में चिपकाए हुए एक अजीब सा सुकून पा रहा था. उसके मादक जिस्म की महक मुझे एक अजीब से लोक में ले गई थी.

हम थोड़ी देर में अलग हो गए. मैं उसे देखने लगा. वो भी मेरी आंखों में झांकने लगी. फिर उसने शर्म से अपनी आंखें झुका लीं.

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मैं हंस दिया, तो वो भी हंस दी.

मैंने कहा- मुझे तुमसे कुछ कहना है.
वो बोली- अब भी कुछ कहना बाकी है?
मैंने कहा- हां.

वो मेरी तरफ देखने लगी.

आज मैं उसे पाना चाहता था, इसलिए मैंने बिना कुछ कहे फिर से अपनी बांहें उसकी तरफ फ़ैला दीं.

वो समझ गई. उसने नजरें झुका कर बोला कि अभी एक घंटा है, तुम्हारा जवाब जो भी हो … मुझे इस एक घंटे में प्यार करके बता दो प्लीज़.

ये कहते हुए उसने क्लास रूम बंद कर दिया और एक एक करके अपनी शर्ट के बटन खोल दिए और मुझसे लिपट गयी.

अब शेर के आगे बकरे को डालोगे, तो उसका शिकार तय है. मैंने भी सोचना छोड़ दिया और उससे लिपट गया. मैं उसे कस कस कर लिपकिस करने लगा. मेरे हाथों ने उसकी शर्ट को निकाल दिया. उसने भी मेरी शर्ट निकाल दी.

उसकी चुचियां बिल्कुल तनी हुई और कसी हुई थीं, किसी बॉल की तरह गर्म थीं. हम दोनों की सांसें एकदम गर्म हो चुकी थीं. उसने मेरी जींस और जांघिया खोल कर मुझे नंगा कर दिया. मैंने भी उसे पूरी तरह से नंगा कर दिया और हम दोनों एक दूसरे के नंगे जिस्मों की अगन को महसूस करने लगे.

इस समय हम दोनों ही कामवासना के वशीभूत थे. मैंने इधर उधर देखा और दो हाई बेंच मिलाकर अपने लिए सेज तैयार कर ली. मैंने उसे उस पर लिटा दिया. उसने भी लेट कर अपनी आंखें मूंद लीं.

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मैंने उसके दोनों चुचों को चूसना चालू कर दिया और हाथ चुत पर लगा दिया. वो ‘आ आ आआ आऊऊऊ ऊऊऊऊ आउच..’ कर रही थी.

उसने अपने पैर फैलाते हुए कहा- रोहण अब जल्दी से मेरी चुत में अपना लंड डाल दो … मुझसे सहन नहीं हो रहा.

मैंने उसके दोनों पैर पूरी तरह से फैला दिए और उसकी चुत को देखने लगा. उसकी चुत पर हल्के बाल थे और उसकी चुत एकदम गुलाब की पंखुड़ियों के जैसे पिंक थी.

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मैंने पोर्न फिल्मों से चुदाई करना कुछ सीख लिया था. बस वही सब याद करते हुए मैंने सीधे अपनी जीभ को उसकी चुत पर लगा दी.

जैनब इस समय गर्म हो चुकी थी. उसने आंख खोल कर मिन्नत भरी आवाज बोली कि रोहण अभी ये सब छोड़ो … पहले जल्दी से अन्दर डाल दो … नहीं तो लंड खा जाऊँ गी.

मगर मैं उसकी चुत चूसने में लीन रहा. उसकी चुत की आग बेहद बढ़ गई थी.
उसने अपने दोनों पैरों और हाथों से मेरा सिर अपनी चुत में ठेल दिया और मादक आवाजें निकलाने लगी ‘ऊऊऊ यसस्स … सीसीई.’

वो तेज आवाज निकलते हुए झड़ने लगी और फिर ढीली होने लगी.

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एक मिनट तक मानो झंझावात थम सा गया था. अचानक से जैनब उठ गई और मेरा लंड मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.

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अब मैं ‘आहा आह..’ की आवाज निकालने लगा.

एक मिनट बाद ही मैंने जैनब के मुँह से लंड खींच लिया और उसकी चुत फाड़ने की तैयारी में जुट गया.

मैं इस समय पूरे जोश में आ गया था. मैंने हाई बेंच पर जैनब को चित लिटाया और अपने लंड को उसकी चुत पर घिसने लगा.

जैनब फिर से गरम हो गयी थी. उसने खुद ही लंड चुत पर सैट कर लिया. उसकी चुत सील बंद थी.

उसने बोला- रोहण मेरा पहली बार है … प्लीज़ मेरी चुत में धीरे धीरे धक्का देना … मुझे दर्द होगा, लेकिन तुम छोड़ना नहीं.

मैं ठहरा अनाड़ी … मैंने पहले ही धक्के में 3 इंच लंड चुत में उतार दिया. जैनब की चूत से खून आने लगा. वो दर्द से छटपटाने लगी. मैंने उसे गले लगा कर कस कर दाबे रखा और किस करने लगा.

उसकी आंखों से आंसू आ रहे थे, वो कांप रही थी. उसके शरीर की कम्पन के रुकते ही मैंने लंड चुत में पेल दिया. चुत चीरता हुआ मेरा 7 इंच का लंड चुत में गायब हो गया.

जैनब ने मुझे कसके जकड़ लिया और दबी जुबान से चिल्लाई- उई ममउम्मी … मर गई!

मैं उसे चूमता रहा. उसकी चुचियों को चूसता रहा और धीरे धीरे उसे चोदने लगा.

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अब जैनब को भी मजा आने लगा. वो भी मस्त हो गई औऱ ‘आह आह आउच ओह आह..’ की आवाज निकलने लगी.

‘आह और जोर से … मेरे रोहण..’

मैं भी पूरी ताकत से उसे चोदने लगा. कुछ ही मिनट बाद वो मुझे पकड़ कर झड़ चुकी थी. मैंने भी देर नहीं करते हुए ताबड़तोड़ धक्के देना शुरू कर दिए. मैं भी झड़ने वाला हो गया था.

मैंने उससे पूछा, तो वो बोली- मैंने पहली बार किसी को पसंद किया है … आज चुत का उद्घाटन हुआ है … तुम अन्दर ही डाल दो.

मैंने 20 धक्के मारकर जैनब को जकड़ लिया. जैनब ने भी मुझे जकड़ लिया और हम दोनों झड़ने लगे.

जैनब की आंखों में ख़ुशी थी. हमने एक दूसरे को जबरदस्त किस किया और अलग होकर कपड़े पहने.

मैंने जैनब को दूसरे लड़कों और मोहल्ले के लड़कों के विचार उसे बताए और उसे बताया कि मैंने तो तुम्हें उनसे बचाने के लिए अब तक ऐसे किया था.

उसने बोला- जो भी हो … मेरी तरफ से सिग्नल मिलने के बाद भी तुमने अपनी अच्छाई नहीं छोड़ी … ये मुझे बहुत अच्छा लगा.
मैंने उससे पूछा- और क्या क्या अच्छा लगा … मेरा मतलब अभी दस मिनट पहले.
वो हंस दी और कहने लगी- तुमने बहुत अच्छा चोदा है मुझे … जब भी मन हो बोल देना, लेकिन मैं जानती हूं तुम अभी भी नहीं बोल पाओगे.

मैंने उसे फिर से चूम लिया.

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वो बोली- रोहण ये बात हम दोनों के बीच ही रहनी चाहिए.
मैंने बोला- ठीक है.

अब तक 2:30 बज चुके थे. मैं उससे केक देखने को कह कर डेकोरेशन का सामान लेने चला गया.

अब हम दोनों जब भी मिलते, मुस्कुरा देते थे. हालांकि मेरा प्यार परवान तो चढ़ा, पर मंजिल नहीं पा सका. उसकी शादी हो गयी और बच्चे भी हो गए.

आपको जवान कुंवारी लड़की की पहली बार चुदाई की मेरी सेक्स कहानी कैसी लगी. मुझे मेरे ईमेल [email protected] पर जरूर बताएं. और सेक्स विडियो और new कहानी पढने के लिये telegram ग्रुप join कर सकते है.

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Classromm ke ladki ki seal todi – Freehindisexstories

Freehindisexstories: All the boys used to look down on a girl in my class because she was a mistress of innocent beauty. I used to feel bad listening to the words of the boys. So what did i do?

My name is Rohan. When I was 19 years old, I liked a girl named Zainab (notional name). Zainab used to study under my coaching. Zainab had a fair complexion and was about five and a half feet tall. His size was 32 inches and his eyes were thorny like Freehindisexstories.

Seeing Zainab, the boys of coaching and locality used to calm themselves by killing Muth.

We had this coaching in school itself. After school, he would walk from coaching to home from 03:00 in the evening. I am good at studies… I am always a boy away from girls in Freehindisexstories.

Why did I not see this and it seemed that this girl should save me from the lust of these hungry wolves. Thinking of this, whenever I used to go home from coaching, I used to make some distance behind Zainab by reaching him to his house then Freehindisexstories.

A friend of mine used to understand this thing of mine. At first he did not pay attention to this thing of mine. But when friends started talking about Zainab’s youth, I was uprooted the Freehindisexstories.

Seeing all this, my friend understood that I love Zainab very much.
He told me that if you like Zainab, why not say your thing to him?

But I could not say that, maybe my shyness was coming in the way of letting me do it.

Freehindisexstories
Then it is a matter of one day that this friend of mine challenged me that if you want to save that girl from the force of a boy, then beat that girl. Otherwise, someone will mash the bud.
I said – OK… I will propose myself in a month on Freehindisexstories.

Now it was a challenge in front, so I thought of an idea. I used to come and go coaching like always, but along with studies, I would keep watching Zainab. At the same time, when I could see him, I would turn my eyes on the board. Zainab smiled twice as well in this way… But I turned my face to him like Freehindisexstories.

Even after coaching, when he used to go to his house, he would have reached home. He had noted this for Freehindisexstories.

Meanwhile, I did not say anything to him. Zainab also understood that I stayed from saying anything to him.

One day test exams were going on. I had solved all the questions. Meanwhile, whoever asked me for help… I helped everyone on Freehindisexstories.

Suddenly my pen’s ink ran out. I freaked out. Seeing me upset, a friend of mine asked me – what happened?

I ran the pen on my palm and told him that the ink ink was over the Freehindisexstories.

When my friend saw this, he said to the class almost shouting loudly – Bhai has brought some extra pen, so give it… Rohan’s pen is not working.

Zainab looked at me with a smile and first of all took out a pen from his box and extended it towards me.

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Then he also introduced his answers to me whether he wrote correctly or not in Freehindisexstories.

Seeing this, my friends started tightening it after seeing him or me. Both of us silently listen to this and smile and avoid everyone’s fables.

Then 5 September was coming. All started collecting donations to celebrate Teachers’ Day. Girls took gifts and boys took responsibility for decoration. I took the responsibility of the cake and decided that I would bring the cake to the coaching class at one o’clock on September 5 and from 2:30, I would go to bring decorations the Freehindisexstories.

Zainab came to know about my plan. Zainab reached coaching shortly before one o’clock on September 5. I too arrived after five minutes in Freehindisexstories.

I was surprised to see Zainab. I asked – arrived so soon?

He proposed to me at that time. I was stunned… I was dead. She started crying after seeing me silent. I could say something, he went ahead and gave me lipstick.

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As soon as she wrapped me, I realized her clothes. He did not wear anything inside the shirt. I did not know the desire to stick with Zainab. His stuffed umbrellas warmed me up completely and I too kissed him completely in return like Freehindisexstories.

I tighten it in my arms. There were tears in his eyes to find love and I was also finding him a strange relief sticking in my chest. The smell of his intoxicating body took me into a strange world Freehindisexstories.

We broke up in a while. I started looking at him. She also started looking into my eyes. Then he bowed his eyes in shame.

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When I laughed, she laughed too.

I said – I want to tell you something.
She said – is there anything left to say?
I said yes.

She started looking at me.

Today I wanted to have it, so I spread my arms towards him again without saying anything.

She understood He bowed his eyes and said that there is an hour now, whatever your answer… Please tell me in this one hour of love in Freehindisexstories.

Saying this, he closed the class room and opened his shirt buttons one by one and hugged me then Freehindisexstories.

Now if you put the goat in front of the lion, then its prey is certain. I too stopped thinking and hugged him. I started to tighten it tightly. My hands removed his shirt. He also took off my shirt.

His legs were tight and tight, hot like a ball. Both of us had become very hot. He opened my jeans and underpants and naked me. I too completely naked her and we both started to feel each other’s naked bodies Freehindisexstories.

At this time both of us were subjected to sex. I looked here and there and got two high benches and prepared an SEZ for myself. I put her on it. He too lay down and closed his eyes.

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I started sucking both her nipples and put my hands on the pussy. She was doing ‘Aa aa aa aaau ooooooooo oooch ..’.

He spread his legs and said – Rohan now quickly put my cock in my pussy… I can not bear it.

I spread both her legs completely and started looking at her pussy. She had light hair on her pussy and her pussy was pink like rose petals Freehindisexstories.

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I had learned something from porn movies. Just remembering all that, I put my tongue directly on his pussy.

Zainab was hot at this time. He opened his eyes and said with a loud voice that Rohan leave all this now… first put it in quickly… otherwise I will eat cocks.

But I was engrossed in sucking her pussy. The fire of his pussy had increased immensely.
He thrust my head into his pussy with both his legs and hands and started making out loud sounds ‘Ooooo yessss… CCE.’

That loud sound started falling and then started to loose.

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For a minute, as if the storm had stopped. Suddenly Zainab got up and took my cock in her mouth and started sucking it like a lollipop.

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Now I started to make a sound of ‘Aaaaaaaaaah ..’.

After a minute I pulled the cocks out of Zainab’s mouth and got ready to tear her pussy.

I was full of excitement this time. I lied to Zainab on the high bench and started rubbing his cock on her pussy.

Zainab was hot again. He set himself on the cock pussy. His pussy was sealed.

He said – Rohan is my first time… please push me slowly in my pussy… I will feel pain but you do not leave.

I stayed clumsy… I already kicked 3 inch cocks in the box. Blood started coming from Zainab’s pussy. She started to flirt with pain. I hugged him tightly and kept kissing.

Tears were coming from her eyes, she was shivering. As soon as his body stopped vibrating, I licked my cock. My 7-inch cock licked and fell into the pussy.

Zainab held me tightly and shouted with a tongue-ooo mamummi… she died!

I kept kissing her. Sucked her nipples and started fucking her slowly.

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Now Zainab also started having fun. She too became cool and the voice of ‘Ah ah Ouch oh ah ..’ started coming out.

‘Ah and loud … my cry ..’

I also started fucking him with full force. After a few minutes she had caught me and had fallen. While not delaying, I started to bang. I had become a loser too.

When I asked her, she said- I have liked someone for the first time… Today Chut is inaugurated… You should put it inside.

I hit Zainab by hitting 20 strikes. Zainab also grabbed me and we both started falling.

Zainab was happy in his eyes. We kissed each other tremendously and dressed separately.

I told Zainab the thoughts of the other boys and the boys of the locality and told him that I had done so far to save you from them.

He said- Whatever … You did not give up your goodness even after getting the signal from my side … I liked it very much.
I asked him what else he liked… I mean just ten minutes ago.
She laughed and started saying – You are very good fuck me… Whenever you want to speak, but I know you will still not be able to speak.

I kissed her again.

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That quote – Rohan, this thing should remain between us.
I said – okay.

It was already 2:30 pm. I asked him to look at the cake and went to get the decorations.

Now both of us used to smile whenever we met. Although my love rose, but could not reach the destination. He got married and had children too.

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