Real Mosi Sex Story 1 मोसी भान्जे की सच्ची सेक्स स्टोरी fun

मोसी भान्जे की सच्ची सेक्स स्टोरी Real Mosi Sex Story x stories in hindi

Real Mosi Sex Story x stories in hindi: मौसी की चूत चुदाई की कहानी में पढ़ें कि मैं मां के साथ मैं ननिहाल गया. वहां पर मौसी भी आई. रात में मुझे मौसी की नंगी टांगें दिखाई दे गयी तो मैंने क्या किया?

दोस्तो, मेरा नाम है शिवम और मैं भोपाल का रहने वाला हूँ. मेरे घर में मेरे मम्मी पापा और एक बड़ी बहन है. मेरी बहन की शादी हो चुकी है तो घर में हम बस तीन लोग ही रहते हैं.

मैं पास के ही एक कॉलेज में पढ़ता हूं. साथ में एक सरकारी एग्जाम की की तैयारी भी कर रहा हूं. मैं ज़्यादा आकर्षक तो नही हूं लेकिन कुछ लड़कियां मुझे भाव दे देती हैं. मेरा शरीर हट्टा कट्टा है इसलिए बॉडी से ठीक दिखता हूं. मेरे लंड का साइज 5.7 इंच है.

अब मैं आपको अपनी मौसी की चुदाई स्टोरी बताता हूं. ये बात आज से 2 साल पहले की है. मैं अपनी मां के साथ अपनी नानी के घर जा रहा था. मां को नानी से मिलने जाना था. नानी का घर हमारे घर से इतनी दूरी पर था कि पहुंचने में 5-6 घंटे लग जाते थे.

नानी के घर के लिए हम लोग दिन में 12 बजे निकले और वहां पर पहुंचने में हमें शाम हो गयी. उस दिन हम काफी थक गये थे. हम लोग खाना खाकर सो गये.

अगली सुबह मैं उठा. जब तक नहा धोकर फ्रेश होकर मैंने नाश्ता किया तो तब तक मेरी मौसी भी नानी के घर आ पहुंची. चूंकि मां भी वहां थी इसलिए मौसी अपनी बहन से मिलने आई थी.

मैं आपको अपनी मौसी के बारे में बता देता हूं. मेरी मौसी शादीशुदा है और पेशे से टीचर है. उनका फिगर 34-32-34 है. वो दिखने में एकदम माल लगती है.

मौसी का बदन बिल्कुल गोरा है. उन्होंने अपने आप को काफी संभाल कर रखा हुआ है. वो खाने पीने का ध्यान रखती है और साथ में कुछ व्यायाम भी करती रहती है ताकि उनका फिगर सही शेप में बना रहे.

मौसी के आने के बाद हम लोगों ने खूब बातें कीं. खाने पीने और बातों में पूरा दिन निकल गया. शाम हो गयी और मैं टीवी देखने लगा. रात का खाना बन गया और सब लोग खाने लगे. फिर मैंने कुछ देर टीवी देखा और मुझे नींद आने लगी.

उसके बाद मैं एक रूम में जाकर सो गया. घर ज्यादा बड़ा नहीं था. कुछ देर के बाद टीवी बंद कर दिया गया. मां और मौसी भी उसी कमरे में आकर सो गयी जिसमें मैं सो रहा था. मेरी बगल में मां सो रही थी और मौसी मां की बगल में दूसरे कोने में थी.

सर्दी का मौसम था तो मुझे जल्दी नींद आ गयी थी. रात के करीब 1 बजे मेरी नींद खुली. मुझे पेशाब लगी हुई थी. मैंने देखा कि मां और मौसी अपने अपने कम्बल में सो रही थी. मगर मौसी का एक पैर कम्बल के बाहर था.

मैं पेशाब करने के लिए उठा. मगर मेरा ध्यान बार बार मौसी के नंगे पैर की ओर जा रहा था. उनकी मैक्सी शायद कम्बल की वजह से ऊपर सरक गयी थी. उनकी चिकनी टांग बार बार मुझे उसको देखने पर मजबूर कर रही थी.

पेशाब करने के बाद मैं वापस आ गया. मगर अब तक मेरी आंखों की नींद जा चुकी थी. मैंने सोने की कोशिश की लेकिन ध्यान बार बार मौसी के बदन पर जा रहा था. मैंने सोचा कि रात का मौका अच्छा है. क्यों न मौसी के जिस्म को नजदीक से देख लूं?

मैं उठ कर दूसरी ओर चला गया और मौसी के बगल में जाकर लेट गया.
मौसी की टांग को देखता रहा. नींद नहीं आ रही थी. फिर मैं मौसी की ओर घूम गया और मैंने अपना हाथ मौसी के नंगे पैर पर रख दिया. मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं मौसी जाग न जाये. मगर अच्छा भी लग रहा था.

मौसी की जांघ बहुत ही मुलायम थी. हिम्मत करके मैंने मौसी की टांग पर हाथ से सहलाना शुरू कर दिया. मेरा हाथ और ऊपर की ओर जाना चाहता था क्योंकि आखिरी मंजिल तो मौसी की चूत ही थी. मर्द को आखिरकार चूत ही चाहिए. मेरे मन में मौसी की चूत चुदाई का ख्याल आ गया था.

मेरे सहलाने से मौसी कोई हरकत नहीं कर रही थी. मुझे पूरा यकीन हो गया था कि मौसी गहरी नींद में है. इसलिए मेरी हिम्मत भी बढ़ती जा रही थी. मेरा हाथ बार बार मौसी की जांघों के सबसे ऊपरी हस्से में उनकी चूत के पास जाने को बेताब था.

धीरे धीरे हौसला बढ़ता गया और मैं अपने हाथ को ऊपर की ओर ले जाने लगा. एक समय आया कि मेरा हाथ मौसी की पैंटी से टकरा गया. पैंटी पर हाथ लगा तो बदन में सरसरी सी दौड़ गयी. चूत के एरिया के पास पहुंचते ही मेरे अरमान मचल उठे.

लंड तन कर एकदम से डंडा हो गया. मगर उत्तेजना इतनी ज्यादा थी कि मन कर रहा था मौसी की चूत को अपने हाथ से पकड़ कर भींच लूं. फिर भी कंट्रोल करके मैंने धीरे धीरे पैंटी के अंदर हाथ देने की कोशिश की.

मौसी की पैंटी बहुत टाइट थी. तभी अचानक हलचल हुई और मैं सहम गया. मैंने एकदम से अपना हाथ वापस खींच लिया. मौसी ने करवट ले ली. वो सीधी होकर सोने लगी. तब मेरी जान में जान आयी.

कुछ देर तक मैंने इंतजार किया. फिर जब पांच मिनट बीत गये और लगा कि मौसी फिर से गहरी नींद में जा चुकी है तो मैंने दोबारा से मौसी की चूत को छूने की कोशिश की. मैंने धीरे से अपना हाथ मौसी की पैंटी के ऊपर रख दिया.

मौसी की चूत की फांकों का उभार मुझे मेरी उंगलियों पर महसूस हो रहा था. मेरा लंड बुरी तरह से झटके देने लगा. एक हाथ से मैं लंड को सहलाने लगा और दूसरे हाथ से मौसी की पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को छेड़ रहा था.

मगर बहुत ही आहिस्ता से मैं ये सब कर रहा था. मेरी उंगलियां इतनी धीरे से चूत को सहला रही थी कि जरा सा भी दबाव न पड़े. मौसी की चूत को छेड़ने का अहसास बहुत ही आनंद दे रहा था.

मैंने धीरे से अब अपनी उंगली को मौसी की पैंटी के अंदर डाल दिया. अब मेरी पहुंच सीधी मौसी की चूत तक हो गयी. उंगलियां मौसी की चूत की फांकों से सीधे संपर्क में आ गयी और जिस्म में हवस का तूफान सा उठ गया.

उत्तेजना में आकर मैंने मौसी की चूत पर ऊपर से नीचे उंगली चलाना शुरू कर दिया. बहुत मजा आ रहा था चूत पर उंगली चलाने में. उत्तेजना इतनी ज्यादा थी कि मन कर रहा था चूत में उंगली दे देकर मौसी की चूत को चोदने लगूं.

शायद अब मौसी की नींद भी टूट चुकी थी क्योंकि चूत पर उंगली चलते वक्त अब वो थोड़ी हिलने लगी थी. अब मैं और नहीं रुक पा रहा था. मैंने सोचा कि जो होगा देखा जायेगा. मैंने मौसी की चूत में उंगली अंदर दे दी.

मौसी हल्की सी उचक गयी. अब मेरे अंदर सेक्स का शैतान जाग गया था और मैं बिना कुछ सोचे मौसी की चूत में उंगली चलाने लगा.

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तभी मौसी ने आंख खोल दी और अपना हाथ सीधे मेरे लंड पर रख दिया.
एक बार तो मेरी ऊपर की सांस ऊपर और नीचे की नीचे रह गयी.

मगर इससे पहले मैं कुछ और प्रतिक्रिया दे पाता मौसी ने अपने हाथ से मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया. वो मेरी लोअर के ऊपर से ही मेरे लंड को पकड़ कर अपने हाथ में भरने की कोशिश कर रही थी.

मौसी का हाथ बार बार मेरे लंड पर ऊपर से नीचे सहला रहा था जैसे कि मौसी मेरे लंड का नाप ले रही हो. वो अपनी उंगलियों से लंड को हाथ में भींच भींच कर उसकी सख्ती की जांच कर रही थी. लंड पर मौसी का हाथ लगने से ही मैं तो जैसे हवा में उड़ने लगा था.

अब सब कुछ क्लियर था. मौसी की चुदाई निश्चित थी. जिस आग में मैं जल रहा था उसी में मौसी भी जल रही थी.

मौसी की पैंटी को मैंने खींचने की कोशिश की लेकिन उनकी भारी गांड के नीचे दबी हुई थी. फिर मौसी ने खुद ही हल्की सी गांड उठाई और पैंटी को खींच कर अपनी जांघों में फंसा छोड़ दिया.

मैंने तुरंत मौसी की चूत में उंगली दे दी और तेजी से मौसी की चूत में उंगली चलानी शुरू कर दी. मन तो कर रहा था कि मौसी की चूत में पूरा हाथ ही दे दूं मगर दूसरी ओर मौसी की बगल में मां भी सो रही थी. इसलिए सब कुछ बिना आवाज किये करना था.

मौसी ने भी मेरे पेट से मेरी टीशर्ट हटा कर लोअर में हाथ दे दिया. फिर अंदर मेरे अंडरवियर की इलास्टिक में से हाथ घुसाते हुए मेरे खड़े लंड को अपने हाथ में ले लिया और उसकी मुठ मारने लगी.

उनका हाथ मेरी ओअर में घुसा हुआ ऊपर नीचे चलता हुआ साफ दिखाई दे रहा था. मेरे लंड की नसें फटने को हो रही थीं. मन कर रहा था कि बस मौसी की चूत में लंड दे दूं और उनको पटक पटक कर चोद दूं.

मेरी उंगली चलने से मौसी की चूत गीली होने लगी थी. अब हल्की पच पच की आवाज आने लगी थी. इधर मेरे लंड से भी कामरस चूने लगा था. जिससे कि टोपा पूरा चिकना हो गया और झाग बनने से पचर-पचर की हल्की आवाज हो रही थी.

चार-पांच मिनट हो चुके थे हमें एक दूसरे से जननांगों से खेलते हुए. तभी अचानक मौसी की चूत से काफी सारा पानी निकल गया. मेरा हाथ पूरा मौसी की चूत के पानी में भीग गया. इसी बात से उत्तेजित होकर मेरा वीर्य भी छूट गया और मौसी का पूरा हाथ मेरे गाढ़े वीर्य में सन गया.

मौसी ने हाथ मेरे अंडरवियर से खींचते हुए लोअर से बाहर निकाला. आधा वीर्य तो मेरे अंडरवियर और लोअर से लग कर ही पोंछा गया. मगर अभी भी मौसी का हाथ पूरा चिकना लग रहा था.

मैंने भी मौसी की पैंटी से हाथ खींच लिया. दोनों शांत हो गये और मौसी ने चुपके से मेरे कान में कहा- अभी सो जा, तेरी मां जाग जायेगी. अब बाकी कल दिन में करेंगे.

मौसी के कहने पर मैं आहिस्ता से वहां से उठा और अपनी वाली जगह पर आकर लेट गया. वीर्य छूटने के बाद बहुत अच्छा लग रहा था और साथ में खुशी भी थी कि मौसी की चूत चुदाई के लिए मिलेगी. फिर हम दोनों कम्बल ओढ़कर सो गये.

अगले दिन हम उठे. दिन भर मौसी और मेरे बीच में नैन मटक्का चलता रहा. रात के इंतजार में दिन काटना मुश्किल हो रहा था. बस दोनों मौका ढूंढ रहे थे कि कब अकेले हों.

फिर शाम को मेरी मां, नानी और मौसी को कहीं जाना था. मगर मौसी ने बहाना करके जाने से मना कर दिया.
फिर नानी और मां ही चली गयीं. हम भी यही चाह रहे थे कि हमें घर में अकेले रहने का मौका मिले और मौसी की चूत चुदाई हो सके.

मौसी की चूत चुदाई शुरू हुई

मां और नानी के जाते ही मौसी ने दरवाजे को अंदर से बंद कर लिया. फिर हम दोनों जल्दी से रूम में गये और एक दूसरे पर टूट पड़े. मौसी और मेरे होंठ आपस में मिल गये और मैंने जोर जोर से मौसी के होंठों को पीना शुरू कर दिया. मौसी भी मेरा साथ देने लगी.

किस करते हुए ही हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े उतारने शुरू कर दिये. दो-चार मिनट में ही हम दोनों पूरे नंगे हो चुके थे. मौसी मेरे लंड को पकड़ कर सहलाते हुए मुझे किस कर रही थी और मैं मौसी के चूतड़ों को भींचते हुए उसको चूस रहा था.

कभी उसकी गर्दन पर तो कभी उसके कंधों पर मैं चूम रहा था. फिर मैंने मौसी की चूचियों को पीना शुरू कर दिया और मौसी के मुंह से आह्ह करके सिसकारी निकल गयी. वो मेरे सिर को अपनी चूचियों में दबाने लगी और मैं उसके निप्पलों को दांतों से खींच कर हल्का काटने लगा.

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जैसे ही मैं मौसी के निप्पल काटता तो उसका हाथ मेरे लंड को कस कर रगड़ देता. कुछ देर चूचियों को पीने के बाद मैं उनकी जांघों के पास घुटनों पर बैठ गया. मैंने मौसी की चूत को ध्यान से देखा.

मौसी की चूत एकदम से साफ थी. उत्तेजना के कारण मौसी की चूत गीली होना शुरू हो गयी थी. मैंने एकदम से अपना मुंह मौसी की चूत में लगा दिया और उसको चूस गया.

अपनी जांघों को फैलाते हुए मौसी ने भी मेरी जीभ का स्वागत अपनी चूत में किया और मैंने जीभ अंदर घुसा दी. मैं तेजी से जीभ को अंदर बाहर करते हुए मौसी की चूत में जीभ से चोदने लगा.

मौसी पगला गयी और मेरे मुंह को अपनी चूत में दबाने लगी. काफी देर तक मैं मौसी की चूत में जीभ चलाता रहा और वो स्सस … अहह … आहहह … आआहहा … करते हुए सिसकारती रही.

फिर उसने मुझे वहीं बेड पर गिरा लिया और मुझे कम्बल में लेकर घुस गयी. कम्बल के अंदर मौसी ने मेरे लंड को मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगी. मैं सातवें आसमान की सैर करने लगा. मौसी अपनी जीभ अंदर ही अंदर मेरे लंड पर चला कर मुझे पागल कर रही थी.

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जब मुझसे बर्दाश्त न हुआ तो मैंने कम्बल उतार फेंका और मौसी को अपने नीचे पटक लिया. मैंने मौसी की चूत पर लंड लगा दिया और उसके सुपारे को ऊपर नीचे मौसी की चूत पर चलाने लगा.

मौसी अपनी चूत चुदाई के लिए तड़प उठी और अपनी चूचियों को अपने ही हाथों से भींचने लगी. अब मैं भी और नहीं रुक सकता था. मैंने हल्का सा झटका दिया तो मौसी थोड़ी कसमसा गयी और बोली- आराम से करना.

फिर मैंने हल्का सा जोर लगा कर धक्का दिया तो आधा लंड मौसी की चूत में सरक गया.
मौसी- बोला था न आराम से करो.
मैंने बोला- सॉरी मौसी.

उसके बाद मैंने लंड को यूं ही डाले रखा और मौसी के होंठों को पीने लगा. धीरे धीरे मैंने अपनी गांड को आगे पीछे करते हुए मौसी की चूत में लंड को अंदर बाहर चलाने की कोशिश की. इतना आनंद आया कि मैंने एकदम से दूसरा जोर का धक्का मारा और पूरा लंड मौसी की चूत में घुसा दिया.

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मौसी कसमसाई और मैंने उसके होंठों को जोर जोर से चूसना और काटना शुरू कर दिया. अब मौसी नीचे से खुद ही अपनी चूत को मेरे लंड की ओर धकेलने लगी. मुझे इशारा मिल गया और मैंने मौसी की चुदाई शुरू कर दी.

हम दोनों चुदाई में खो गये. दोनों के जिस्म का एक ही रिदम बन गया. मैं ऊपर से धक्का लगाता और नीचे से मौसी अपनी चूत को आगे धकेल देती. मौसी की चूत में लंड घुसा घुसा कर चोदने में मुझे स्वर्ग सा आनंद मिलने लगा.

मौसी भी मेरी पीठ पर अपने नाखूनों को चुभा रही थी जिससे पता चल रहा था कि मौसी को मेरा लंड लेने में कितना मजा आ रहा था. अब मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी. चूंकि मौसी की चूत पहली बार चोद रहा था इसलिए उत्तेजना ज्यादा थी.

मैंने पूरे जोश में मौसी की चूत को चोदना शुरू कर दिया और मौसी भी लंड को पूरी प्यास के साथ अंदर ले लेकर आनंदित हो रही थी. दस मिनट तक मौसी की चूत की मस्त चुदाई चली.

फिर मौसी का बदन अकड़ गया और उसने मुझे अपनी बांहों में भींच लिया. मौसी की चूत से गर्म गर्म पानी लगता हुआ मुझे मेरे लंड पर महसूस हुआ. चूत से पच-पच की आवाज होने लगी मगर इतने में ही मौसी का बदन ढीला पड़ने लगा.

मैं भी अब जोर जोर से चूत को पेलने लगा और दो मिनट के बाद मैं भी मौसी की चूत में ही झड़ गया. मैं हाँफता हुआ मौसी के ऊपर लेट गया और वो मेरे बालों को सहलाने लगी.

कुछ देर हम लेटे रहे और उसके बाद हमने फिर से एक राउंड चुदाई का और खेला. उस शाम को दो बार मैंने मौसी की चूत चुदाई की. अब मां और नानी के आने का टाइम भी हो रहा था. इसलिए हमने इससे ज्यादा रिस्क लेना ठीक नहीं समझा.

फिर अगले दिन हम अपने घर के लिए निकलने लगे और मौसी अपने घर के लिए जाने लगी.
जाते हुए मौसी मेरी ओर देख कर मुस्करा रही थी. मुझे भी मौसी की चूत चोद कर बहुत मजा आया.

दोस्तो, ये थी मेरी मौसी की सेक्स स्टोरी. आपको मेरी देसी मौसी की चूत चुदाई की ये कहानी पसंद आई होगी. मुझे अपनी राय जरूर बतायें.
कमेंट्स के द्वारा कहानी पर प्रतिक्रिया दें अथवा मुझे नीचे दी गई ईमेल पर संपर्क करें। जल्दी ही मैं कोई नयी कहानी लेकर आऊंगा. धन्यवाद।
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mosee bhaanje kee sachchee seks storee Real Mosi Sex Story x stories in hindi

Real Mosi Sex Story x stories in hindi: mausee kee choot chudaee kee kahaanee mein padhen ki main maan ke saath main nanihaal gaya. vahaan par mausee bhee aaee. raat mein mujhe mausee kee nangee taangen dikhaee de gayee to mainne kya kiya?

dosto, mera naam hai shivam aur main bhopaal ka rahane vaala hoon. mere ghar mein mere mammee paapa aur ek badee bahan hai. meree bahan kee shaadee ho chukee hai to ghar mein ham bas teen log hee rahate hain Real Mosi Sex Story x stories in hindi.

main paas ke hee ek kolej mein padhata hoon. saath mein ek sarakaaree egjaam kee kee taiyaaree bhee kar raha hoon. main zyaada aakarshak to nahee hoon lekin kuchh ladakiyaan mujhe bhaav de detee hain. mera shareer hatta katta hai isalie bodee se theek dikhata hoon. mere land ka saij 5.7 inch hai Real Mosi Sex Story x stories in hindi.

ab main aapako apanee mausee kee chudaee storee bataata hoon. ye baat aaj se 2 saal pahale kee hai. main apanee maan ke saath apanee naanee ke ghar ja raha tha. maan ko naanee se milane jaana tha. naanee ka ghar hamaare ghar se itanee dooree par tha ki pahunchane mein 5-6 ghante lag jaate the.

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main aapako apanee mausee ke baare mein bata deta hoon. meree mausee shaadeeshuda hai aur peshe se teechar hai. unaka phigar 34-32-34 hai. vo dikhane mein ekadam maal lagatee hai.

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mausee halkee see uchak gayee. ab mere andar seks ka shaitaan jaag gaya tha aur main bina kuchh soche mausee kee choot mein ungalee chalaane laga.

usai
tabhee mausee ne aankh khol dee aur apana haath seedhe mere land par rakh diya.
ek baar to meree oopar kee saans oopar aur neeche kee neeche rah gayee.

magar isase pahale main kuchh aur pratikriya de paata mausee ne apane haath se mere land ko sahalaana shuroo kar diya. vo meree loar ke oopar se hee mere land ko pakad kar apane haath mein bharane kee koshish kar rahee thee.

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unaka haath meree oar mein ghusa hua oopar neeche chalata hua saaph dikhaee de raha tha. mere land kee nasen phatane ko ho rahee theen. man kar raha tha ki bas mausee kee choot mein land de doon aur unako patak patak kar chod doon.

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mausee ne haath mere andaraviyar se kheenchate hue loar se baahar nikaala. aadha veery to mere andaraviyar aur loar se lag kar hee ponchha gaya. magar abhee bhee mausee ka haath poora chikana lag raha tha.

mainne bhee mausee kee paintee se haath kheench liya. donon shaant ho gaye aur mausee ne chupake se mere kaan mein kaha- abhee so ja, teree maan jaag jaayegee. ab baakee kal din mein karenge.

mausee ke kahane par main aahista se vahaan se utha aur apanee vaalee jagah par aakar let gaya. veery chhootane ke baad bahut achchha lag raha tha aur saath mein khushee bhee thee ki mausee kee choot chudaee ke lie milegee. phir ham donon kambal odhakar so gaye.

agale din ham uthe. din bhar mausee aur mere beech mein nain matakka chalata raha. raat ke intajaar mein din kaatana mushkil ho raha tha. bas donon mauka dhoondh rahe the ki kab akele hon.

phir shaam ko meree maan, naanee aur mausee ko kaheen jaana tha. magar mausee ne bahaana karake jaane se mana kar diya.
phir naanee aur maan hee chalee gayeen. ham bhee yahee chaah rahe the ki hamen ghar mein akele rahane ka mauka mile aur mausee kee choot chudaee ho sake.

mausee kee choot chudaee shuroo huee

maan aur naanee ke jaate hee mausee ne daravaaje ko andar se band kar liya. phir ham donon jaldee se room mein gaye aur ek doosare par toot pade. mausee aur mere honth aapas mein mil gaye aur mainne jor jor se mausee ke honthon ko peena shuroo kar diya. mausee bhee mera saath dene lagee.

kis karate hue hee ham donon ne ek doosare ke kapade utaarane shuroo kar diye. do-chaar minat mein hee ham donon poore nange ho chuke the. mausee mere land ko pakad kar sahalaate hue mujhe kis kar rahee thee aur main mausee ke chootadon ko bheenchate hue usako choos raha tha.

kabhee usakee gardan par to kabhee usake kandhon par main choom raha tha. phir mainne mausee kee choochiyon ko peena shuroo kar diya aur mausee ke munh se aahh karake sisakaaree nikal gayee. vo mere sir ko apanee choochiyon mein dabaane lagee aur main usake nippalon ko daanton se kheench kar halka kaatane laga.

jaise hee main mausee ke nippal kaatata to usaka haath mere land ko kas kar ragad deta. kuchh der choochiyon ko peene ke baad main unakee jaanghon ke paas ghutanon par baith gaya. mainne mausee kee choot ko dhyaan se dekha.

mausee kee choot ekadam se saaph thee. uttejana ke kaaran mausee kee choot geelee hona shuroo ho gayee thee. mainne ekadam se apana munh mausee kee choot mein laga diya aur usako choos gaya.

apanee jaanghon ko phailaate hue mausee ne bhee meree jeebh ka svaagat apanee choot mein kiya aur mainne jeebh andar ghusa dee. main tejee se jeebh ko andar baahar karate hue mausee kee choot mein jeebh se chodane laga.

mausee pagala gayee aur mere munh ko apanee choot mein dabaane lagee. kaaphee der tak main mausee kee choot mein jeebh chalaata raha aur vo ssas … ahah … aahahah … aaaahaha … karate hue sisakaaratee rahee.

phir usane mujhe vaheen bed par gira liya aur mujhe kambal mein lekar ghus gayee. kambal ke andar mausee ne mere land ko munh mein bhar liya aur jor jor se choosane lagee. main saataven aasamaan kee sair karane laga. mausee apanee jeebh andar hee andar mere land par chala kar mujhe paagal kar rahee thee.

jab mujhase bardaasht na hua to mainne kambal utaar phenka aur mausee ko apane neeche patak liya. mainne mausee kee choot par land laga diya aur usake supaare ko oopar neeche mausee kee choot par chalaane laga.

mausee apanee choot chudaee ke lie tadap uthee aur apanee choochiyon ko apane hee haathon se bheenchane lagee. ab main bhee aur nahin ruk sakata tha. mainne halka sa jhataka diya to mausee thodee kasamasa gayee aur bolee- aaraam se karana.

phir mainne halka sa jor laga kar dhakka diya to aadha land mausee kee choot mein sarak gaya.
mausee- bola tha na aaraam se karo.
mainne bola- soree mausee.

usake baad mainne land ko yoon hee daale rakha aur mausee ke honthon ko peene laga. dheere dheere mainne apanee gaand ko aage peechhe karate hue mausee kee choot mein land ko andar baahar chalaane kee koshish kee. itana aanand aaya ki mainne ekadam se doosara jor ka dhakka maara aur poora land mausee kee choot mein ghusa diya.

mausee kasamasaee aur mainne usake honthon ko jor jor se choosana aur kaatana shuroo kar diya. ab mausee neeche se khud hee apanee choot ko mere land kee or dhakelane lagee. mujhe ishaara mil gaya aur mainne mausee kee chudaee shuroo kar dee.

ham donon chudaee mein kho gaye. donon ke jism ka ek hee ridam ban gaya. main oopar se dhakka lagaata aur neeche se mausee apanee choot ko aage dhakel detee. mausee kee choot mein land ghusa ghusa kar chodane mein mujhe svarg sa aanand milane laga.

mausee bhee meree peeth par apane naakhoonon ko chubha rahee thee jisase pata chal raha tha ki mausee ko mera land lene mein kitana maja aa raha tha. ab mainne dhakkon kee speed badha dee. choonki mausee kee choot pahalee baar chod raha tha isalie uttejana jyaada thee.

mainne poore josh mein mausee kee choot ko chodana shuroo kar diya aur mausee bhee land ko pooree pyaas ke saath andar le lekar aanandit ho rahee thee. das minat tak mausee kee choot kee mast chudaee chalee.

phir mausee ka badan akad gaya aur usane mujhe apanee baanhon mein bheench liya. mausee kee choot se garm garm paanee lagata hua mujhe mere land par mahasoos hua. choot se pach-pach kee aavaaj hone lagee magar itane mein hee mausee ka badan dheela padane laga.

main bhee ab jor jor se choot ko pelane laga aur do minat ke baad main bhee mausee kee choot mein hee jhad gaya. main haanphata hua mausee ke oopar let gaya aur vo mere baalon ko sahalaane lagee.

kuchh der ham lete rahe aur usake baad hamane phir se ek raund chudaee ka aur khela. us shaam ko do baar mainne mausee kee choot chudaee kee. ab maan aur naanee ke aane ka taim bhee ho raha tha. isalie hamane isase jyaada risk lena theek nahin samajha.

phir agale din ham apane ghar ke lie nikalane lage aur mausee apane ghar ke lie jaane lagee.
jaate hue mausee meree or dekh kar muskara rahee thee. mujhe bhee mausee kee choot chod kar bahut maja aaya.

dosto, ye thee meree mausee kee seks storee. aapako meree desee mausee kee choot chudaee kee ye kahaanee pasand aaee hogee. mujhe apanee raay jaroor bataayen.
kaments ke dvaara kahaanee par pratikriya den athava mujhe neeche dee gaee eemel par sampark karen. jaldee hee main koee nayee kahaanee lekar aaoonga. dhanyavaad.
[email protected]

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